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Aryansh Arora
dikhaai de rahi hai maut mujhko tere bin yaanii
dikhaai de rahi hai maut mujhko tere bin yaanii | दिखाई दे रही है मौत मुझको तेरे बिन यानी
- Aryansh Arora
दिखाई
दे
रही
है
मौत
मुझको
तेरे
बिन
यानी
तेरे
ही
साथ
जितनी
जी
वही
थी
ज़िंदगी
मेरी
- Aryansh Arora
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न
लौटोगे
कभी
तुम
जानता
हूँ
ये
मेरी
ज़िंदगी
है
फ़िल्म
थोड़ी
SWAPNIL YADAV 'NIL'
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आएगा
वो
दिन
हमारी
ज़िंदगी
में
भी
ज़रूर
जो
अँधेरों
को
मिटा
कर
रौशनी
दे
जाएगा
Anwar Taban
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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है
सहज
स्वीकार
जो
जीवन
पे
वो
अपवाद
तुम
ज़िंदगी
अवसाद
है
अवसाद
में
उन्माद
तुम
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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कटती
है
आरज़ू
के
सहारे
पे
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
किसी
की
तमन्ना
न
चाहिए
Shaad Arfi
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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बात
को
कुछ
यूँँ
छुपाया
जा
रहा
है
बेवजह
ही
मुस्कुराया
जा
रहा
है
देख
लाचारी
मेरी
चुप
चाप
से
ही
छोड़
कर
ये
जिस्म
साया
जा
रहा
है
जेब
ख़ाली
पर
बड़ी
लंबी
है
यानी
जो
नहीं
है
वो
दिखाया
जा
रहा
है
अस्थियों
को
ख़ुद
इकट्ठा
कर
रहा
हूँ
सपनो
को
लिख
कर
जलाया
जा
रहा
है
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Aryansh Arora
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ख़ुद-कुशी
उस
जिस्म
को
आराम
देती
है
जिसको
पहले
आत्मा
ने
छोड़ा
होता
है
Aryansh Arora
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मैं
क्या
कहूँ
कहाँ
कहाँ
से
आया
है
ये
दुख
जो
मेरी
दास्ताँ
से
आया
है
ग़ज़ल
के
बीच
मुझको
रोता
देख
वो
बचाने
मुझको
दो-जहाँ
से
आया
है
ख़याल
शा'इरी
का
शौकिया
नहीं
ये
मेरे
दिल
के
दरमियाँ
से
आया
है
दिखा
के
तेरी
फोटो
मैंने
ये
कहा
ग़ज़ल
में
मेरे
दुख
यहाँ
से
आया
है
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Aryansh Arora
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ज़िक्र
होगा
ख़्वाब
का
उस
में
अगर
फिर
ख़ुद-कुशी
का
ख़त
समझना
उस
ग़ज़ल
को
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Aryansh Arora
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दर्द
का
ये
हिसाब
है
तो
है
हल
जो
इसका
शराब
है
तो
है
जाँच
पड़ताल
भी
नहीं
होगी
उसने
बोला
ख़राब
है
तो
है।
फोड़
थोड़ी
ना
देगा
कोई
भी
आँख
में
कोई
ख़्वाब
है
तो
है
ज़िन्दगी
इक
सवाल
है
जिसका
मौत
ही
इक
जवाब
है
तो
है
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Aryansh Arora
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