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Aryansh Arora
dard ka ye hisaab hai to hai
dard ka ye hisaab hai to hai | दर्द का ये हिसाब है तो है
- Aryansh Arora
दर्द
का
ये
हिसाब
है
तो
है
हल
जो
इसका
शराब
है
तो
है
जाँच
पड़ताल
भी
नहीं
होगी
उसने
बोला
ख़राब
है
तो
है।
फोड़
थोड़ी
ना
देगा
कोई
भी
आँख
में
कोई
ख़्वाब
है
तो
है
ज़िन्दगी
इक
सवाल
है
जिसका
मौत
ही
इक
जवाब
है
तो
है
- Aryansh Arora
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खद्दर
पहन
के
बेच
रहा
था
शराब
वो
देखा
मुझे
तो
हाथ
में
झंडा
उठा
लिया
मैं
भी
कोई
गँवार
सिपाही
न
था
जनाब
मैंने
भी
जाम
फेंक
के
डंडा
उठा
लिया
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Paplu Lucknawi
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कुछ
भी
बचा
न
कहने
को
हर
बात
हो
गई
आओ
कहीं
शराब
पिएँ
रात
हो
गई
Nida Fazli
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दरिया
की
वुसअतों
से
उसे
नापते
नहीं
तन्हाई
कितनी
गहरी
है
इक
जाम
भर
के
देख
Adil Mansuri
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दुनिया
को
मारा
जिगर
के
शे'रों
ने
जिगर
को
शराब
ने
मारा
Jigar Moradabadi
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पिलाओ
जाम
फिर
से
तुम
उसी
के
नाम
का
मुझको
जिसे
दिल
में
उतारे
एक
'अर्सा
हो
गया
है
अब
Abhay Mishra
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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बढ़ाई
मय
जो
मोहब्बत
से
आज
साक़ी
ने
ये
काँपे
हाथ
कि
साग़र
भी
हम
उठा
न
सके
Majrooh Sultanpuri
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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आए
कुछ
अब्र
कुछ
शराब
आए
इस
के
बाद
आए
जो
अज़ाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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मेरा
है
जो
मैंने
सब
पाया
यहाँ
पे
मेरा
जज़्बा
मुझको
ले
आया
यहाँ
पे
मंच
दर्शक
लोग
बातें
तालियाँ
भी
मुझको
आख़िर
मिल
गई
छाया
यहाँ
पे
काफ़ी
है
दो
ज़िन्दगी
के
इस
सफऱ
में
तू
है
इक
दूजा
तेरा
साया
यहाँ
पे
मंज़िलें
ये
देखकर
नायक
चुनेंगी
कौन
कितनी
दूर
से
आया
यहाँ
पे
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Aryansh Arora
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ज़िक्र
होगा
ख़्वाब
का
उस
में
अगर
फिर
ख़ुद-कुशी
का
ख़त
समझना
उस
ग़ज़ल
को
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Aryansh Arora
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मुझको
तो
दीदार
करना
था
तेरा
पागल
समझ
गाड़ी
की
रफ़्तार
थोड़ी
देखने
आई
हूँ
मैं
Aryansh Arora
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ख़ुद-कुशी
उस
जिस्म
को
आराम
देती
है
जिसको
पहले
आत्मा
ने
छोड़ा
होता
है
Aryansh Arora
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दिखाई
दे
रही
है
मौत
मुझको
तेरे
बिन
यानी
तेरे
ही
साथ
जितनी
जी
वही
थी
ज़िंदगी
मेरी
Aryansh Arora
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