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Aryansh Arora
baat ko kuchh yuñ chhupaaya ja raha hai
baat ko kuchh yuñ chhupaaya ja raha hai | बात को कुछ यूँँ छुपाया जा रहा है
- Aryansh Arora
बात
को
कुछ
यूँँ
छुपाया
जा
रहा
है
बेवजह
ही
मुस्कुराया
जा
रहा
है
देख
लाचारी
मेरी
चुप
चाप
से
ही
छोड़
कर
ये
जिस्म
साया
जा
रहा
है
जेब
ख़ाली
पर
बड़ी
लंबी
है
यानी
जो
नहीं
है
वो
दिखाया
जा
रहा
है
अस्थियों
को
ख़ुद
इकट्ठा
कर
रहा
हूँ
सपनो
को
लिख
कर
जलाया
जा
रहा
है
- Aryansh Arora
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ये
सोच
कर
के
कि
उसने
किया
है
याद
मुझे
मैं
मेरी
उँगलियों
पे
हिचकियों
को
गिनता
रहा
पलट
के
उसने
कराया
न
मुझको
चुप
लेकिन
तमाम
रात
मेरी
सिसकियों
को
गिनता
रहा
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Dipendra Singh 'Raaz'
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है
कुछ
ऐसी
ही
बात
जो
चुप
हूँ
वर्ना
क्या
बात
कर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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उसे
बेचैन
कर
जाऊँगा
मैं
भी
ख़मोशी
से
गुज़र
जाऊँगा
मैं
भी
Ameer Qazalbash
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वो
शांत
बैठा
है
कब
से
मैं
शोर
क्यूँँॅं
न
करूँॅं
बस
एक
बार
वो
कह
दे
कि
चुप
तो
चूँ
न
करूँॅं
Charagh Sharma
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अरे
मैं
इंतिक़ामन
रो
रहा
हूँ
मैं
चुप
हो
जाऊँगा
उसको
रुला
के
Swapnil Tiwari
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ख़ामोशी
वो
भी
इतनी
मेरे
उसके
दरमियाँ
इस
दिल
के
टूटने
की
सदा
आ
गई
उसे
NISHKARSH AGGARWAL
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अब
तो
चुप-चाप
शाम
आती
है
पहले
चिड़ियों
के
शोर
होते
थे
Mohammad Alvi
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क़स
में,
वादे,
दरवाज़े
तो
ठीक
हैं
पर
ख़ामोशी
को
तोड़
नहीं
सकता
हूँ
मैं
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Tanoj Dadhich
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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मुझ
में
रहते
हैं
करोड़ों
लोग
चुप
कैसे
रहूँ
हर
ग़ज़ल
अब
सल्तनत
के
नाम
एक
बयान
है
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Dushyant Kumar
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दर्द
का
ये
हिसाब
है
तो
है
हल
जो
इसका
शराब
है
तो
है
जाँच
पड़ताल
भी
नहीं
होगी
उसने
बोला
ख़राब
है
तो
है।
फोड़
थोड़ी
ना
देगा
कोई
भी
आँख
में
कोई
ख़्वाब
है
तो
है
ज़िन्दगी
इक
सवाल
है
जिसका
मौत
ही
इक
जवाब
है
तो
है
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Aryansh Arora
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मेरा
है
जो
मैंने
सब
पाया
यहाँ
पे
मेरा
जज़्बा
मुझको
ले
आया
यहाँ
पे
मंच
दर्शक
लोग
बातें
तालियाँ
भी
मुझको
आख़िर
मिल
गई
छाया
यहाँ
पे
काफ़ी
है
दो
ज़िन्दगी
के
इस
सफऱ
में
तू
है
इक
दूजा
तेरा
साया
यहाँ
पे
मंज़िलें
ये
देखकर
नायक
चुनेंगी
कौन
कितनी
दूर
से
आया
यहाँ
पे
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Aryansh Arora
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ख़ुद-कुशी
उस
जिस्म
को
आराम
देती
है
जिसको
पहले
आत्मा
ने
छोड़ा
होता
है
Aryansh Arora
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ज़िक्र
होगा
ख़्वाब
का
उस
में
अगर
फिर
ख़ुद-कुशी
का
ख़त
समझना
उस
ग़ज़ल
को
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Aryansh Arora
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मैं
क्या
कहूँ
कहाँ
कहाँ
से
आया
है
ये
दुख
जो
मेरी
दास्ताँ
से
आया
है
ग़ज़ल
के
बीच
मुझको
रोता
देख
वो
बचाने
मुझको
दो-जहाँ
से
आया
है
ख़याल
शा'इरी
का
शौकिया
नहीं
ये
मेरे
दिल
के
दरमियाँ
से
आया
है
दिखा
के
तेरी
फोटो
मैंने
ये
कहा
ग़ज़ल
में
मेरे
दुख
यहाँ
से
आया
है
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Aryansh Arora
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