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Mohd Arham
ik teraa vasl saath chaltaa hai
ik teraa vasl saath chaltaa hai | इक तेरा वस्ल साथ चलता है
- Mohd Arham
इक
तेरा
वस्ल
साथ
चलता
है
अब
भी
कपड़े
मेरे
महकते
हैं
- Mohd Arham
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मुझे
मालूम
है
माँ
की
दुआएँ
साथ
चलती
हैं
सफ़र
की
मुश्किलों
को
हाथ
मलते
मैंने
देखा
है
Aalok Shrivastav
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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मशवरा
हम
भी
तो
दे
सकते
थे
पर
तेरा
साथ
दे
रहे
थे
हम
Vishal Singh Tabish
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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जानता
हूँ
कि
तुझे
साथ
तो
रखते
हैं
कई
पूछना
था
कि
तेरा
ध्यान
भी
रखता
है
कोई?
Umair Najmi
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बंदा
किसी
के
साथ,
ख़ुदा
हो
किसी
के
साथ
जाने
पराए
शहर
में
क्या
हो
किसी
के
साथ
Mueed Mirza
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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तेरी
गलियों
से
जब
गुज़रते
हैं
लोग
हँसते
हैं
ताने
कसते
हैं
Mohd Arham
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मैं
उसको
अपना
सब
कुछ
मानता
था
मेरा
होना
भी
जिसका
मसअला
था
मोहब्बत
ख़त्म
होने
जा
रही
थी
वो
मेरे
साथ
अब
उकता
रहा
था
मेरी
चीखें
भी
सुन
के
वो
न
लौटा
जो
आहट
तक
मेरी
पहचानता
था
रवानी
ख़ून
की
कम
हो
चुकी
थी
गले
मिलना
ज़रूरी
हो
गया
था
वो
मुद्दत
बाद
मुझ
सेे
मिल
रही
थी
मैं
उसको
देखते
ही
रो
पड़ा
था
मेरे
सब
ज़ख़्म
यूँँ
तो
भर
चुके
थे
मगर
वो
मुझ
में
अब
भी
रह
गया
था
गँवा
के
उम्र
अपनी
सारी
'अरहम'
दु'आ
मरने
की
अब
मैं
कर
रहा
था
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Mohd Arham
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ज़िन्दगी
थी
मेरी
भी
आँखों
में
जब
तलक
इक
परी
थी
आँखों
में
इसलिए
भी
ख़ुदा
के
पास
रहा
इक
नमाज़न
बसी
थी
आँखों
में
जिसकी
आँखों
में
लाख
चेहरे
हैं
उसका
चेहरा
है
मेरी
आँखों
में
दर्द
सारे
उभरते
जाते
हैं
जाने
सीलन
है
कैसी
आँखों
में
उसके
तोहफ़े
नहीं
किए
ज़ाया'
अश्क
अब
भी
हैं
मेरी
आँखों
में
हाए
'अरहम'
ये
आपका
दुख
भी
रह
न
जाए
किसी
की
आँखों
में
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Mohd Arham
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एक
बच्चे
ने
क़ब्र
पे
लिक्खा
माँ
ये
दुनिया
बड़ा
सताती
है
Mohd Arham
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ग़म-ए-हिज्राँ
को
रुस्वा
कर
रहे
हैं
हम
इक
दुख
और
पैदा
कर
रहे
हैं
वो
मेरा
नाम
साहिल
से
मिटा
कर
अलग
दरिया
से
कतरा
कर
रहे
हैं
दिखाता
था
तमाशा
इक
मदारी
सो
अब
बच्चे
तमाशा
कर
रहे
हैं
ख़ुदा
जाने
की
उनका
क्या
बनेगा
जो
दरिया
से
किनारा
कर
रहे
हैं
सुलगती
रेत
रह
रह
कह
रही
है
ये
बादल
क्यूँ
तमाशा
कर
रहे
हैं
भुला
के
फ़िक्र
हम
महशर
की
'अरहम'
यहाँ
बस
दुनिया
दुनिया
कर
रहे
हैं
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Mohd Arham
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