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Mohd Arham
main usko apna sab kuchh maanta tha
main usko apna sab kuchh maanta tha | मैं उसको अपना सब कुछ मानता था
- Mohd Arham
मैं
उसको
अपना
सब
कुछ
मानता
था
मेरा
होना
भी
जिसका
मसअला
था
मोहब्बत
ख़त्म
होने
जा
रही
थी
वो
मेरे
साथ
अब
उकता
रहा
था
मेरी
चीखें
भी
सुन
के
वो
न
लौटा
जो
आहट
तक
मेरी
पहचानता
था
रवानी
ख़ून
की
कम
हो
चुकी
थी
गले
मिलना
ज़रूरी
हो
गया
था
वो
मुद्दत
बाद
मुझ
सेे
मिल
रही
थी
मैं
उसको
देखते
ही
रो
पड़ा
था
मेरे
सब
ज़ख़्म
यूँँ
तो
भर
चुके
थे
मगर
वो
मुझ
में
अब
भी
रह
गया
था
गँवा
के
उम्र
अपनी
सारी
'अरहम'
दु'आ
मरने
की
अब
मैं
कर
रहा
था
- Mohd Arham
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दिल
ये
करता
है
कि
इस
उम्र
की
पगडंडी
पर
उलटे
पैरों
से
चलूँ
फिर
वही
लड़का
हो
जाऊँ
Mehshar Afridi
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मिल
गए
थे
एक
बार
उस
के
जो
मेरे
लब
से
लब
उम्र
भर
होंटों
पे
अपने
मैं
ज़बाँ
फेरा
किया
Jurat Qalandar Bakhsh
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हम
जिसे
देखते
रहते
थे
उम्र
भर
काश
वो
इक
नज़र
देखता
हम
को
भी
Mohsin Ahmad Khan
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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ख़ूब-सूरत
ये
मोहब्बत
में
सज़ा
दी
उसने
फिर
गले
मिलके
मेरी
उम्र
बढ़ा
दी
उसने
Manzar Bhopali
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उम्र
भर
कौन
निभाता
है
त'अल्लुक़
इतना
ऐ
मेरी
जान
के
दुश्मन
तुझे
अल्लाह
रक्खे
Ahmad Faraz
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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क्यूँ
डरें
ज़िन्दगी
में
क्या
होगा
कुछ
न
होगा
तो
तजरबा
होगा
Javed Akhtar
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उम्र
भर
साँप
से
शर्मिंदा
रहे
ये
सुन
कर
जब
से
इंसान
को
काटा
है
तो
फन
दुखता
है
Munawwar Rana
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इश्क़
को
एक
उम्र
चाहिए
और
उम्र
का
कोई
ए'तिबार
नहीं
Jigar Barelvi
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कहाँ
से
सीखा
है
तुमने
ये
अरहम
की
हर
इक
बात
पे
बस
चीखना
है
Mohd Arham
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ज़रा
तो
सोच
दिल
को
तोड़ने
वाले
कि
तेरा
हश्र
के
दिन
हाल
क्या
होगा
Mohd Arham
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बैठे
बैठे
ये
सोचते
हैं
हम
क्या
हमें
वो
भी
सोचता
होगा
Mohd Arham
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सब्र
करता
नहीं
यहाँ
कोई
और
फल
चाहते
हैं
मीठा
लोग
Mohd Arham
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ऐसा
लगता
है
देखी
दाखी
है
ज़िंदगी
कोई
फ़िल्म
जैसी
है
पाँव
फैला
के
देखा
तो
जाना
दुनिया
कमरे
से
ज़्यादा
छोटी
है
हिज्र
के
दिन
हैं
और
घड़ी
उस
पर
जाने
क्यूँ
उल्टे
पाँव
चलती
है
हाफ़िज़ा
कौन
कर
रहा
है
मेरा
किसके
रटने
से
हिचकी
आई
है
एक
रस्ता
है
आप
तक
जाता
और
उस
में
भी
अफ़रा
तफ़री
है
मैं
मुदावा
करूँगा
क्यूँँ
ग़म
का
मुझको
प्यारी
मेरी
उदासी
है
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Mohd Arham
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