hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Amol
hawa ko khareed'ne ke laale pade hain
hawa ko khareed'ne ke laale pade hain | हवा को ख़रीद'ने के लाले पडे हैं
- Amol
हवा
को
ख़रीद'ने
के
लाले
पडे
हैं
हमारे
कयामत
से
पाले
पड़े
हैं
- Amol
Download Sher Image
देख
कैसे
धुल
गए
है
गिर्या-ओ-ज़ारी
के
बाद
आसमाँ
बारिश
के
बाद
और
मैं
अज़ादारी
के
बाद
इस
सेे
बढ़
कर
तो
तुझे
कोई
हुनर
आता
नहीं
सोचता
हूँ
क्या
करेगा
दिल
आज़ारी
के
बाद
Read Full
Abbas Tabish
Send
Download Image
36 Likes
अपने
होंटों
पर
सजाना
चाहता
हूँ
आ
तुझे
मैं
गुनगुनाना
चाहता
हूँ
Qateel Shifai
Send
Download Image
24 Likes
रहनुमाओं
की
अदाओं
पे
फ़िदा
है
दुनिया
इस
बहकती
हुई
दुनिया
को
सँभालो
यारो
Dushyant Kumar
Send
Download Image
34 Likes
अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
Send
Download Image
41 Likes
सुख़न
का
जोश
कम
होता
नहीं
है
वगरना
क्या
सितम
होता
नहीं
है
भले
तुम
काट
दो
बाज़ू
हमारे
क़लम
का
सर
क़लम
होता
नहीं
है
Read Full
Baghi Vikas
Send
Download Image
64 Likes
मैं
उस
को
देख
के
चुप
था
उसी
की
शादी
में
मज़ा
तो
सारा
इसी
रस्म
के
निबाह
में
था
Muneer Niyazi
Send
Download Image
43 Likes
मुझ
सेे
मेरा
वजूद
तो
साबित
नहीं
हुआ
तू
आँख
भर
के
देख
ले,
होने
लगूँगा
मैं
Sohaib Mugheera Siddiqi
Send
Download Image
39 Likes
मुझे
शराब
पिलाई
गई
है
आँखों
से
मेरा
नशा
तो
हज़ारों
बरस
में
उतरेगा
Vijendra Singh Parwaaz
Send
Download Image
48 Likes
कभी
हम
से
भी
कोई
बात
कीजे
हमें
भी
है
सलीक़ा
गुफ्तगू
का
Meem Alif Shaz
Send
Download Image
0 Likes
असर
करती
है
कोई-कोई
बात
आहिस्ता
आहिस्ता
समझ
में
आते
हैं
कुछ
मोजज़ात
आहिस्ता
आहिस्ता
Aamir Azher
Send
Download Image
24 Likes
Read More
अब
हमें
इस
सफ़र
से
निकलना
हैं
कुछ
दिनों
बाद
घर
से
निकलना
हैं
हैं
नदामत
इलाही
,
रहम
बरसा
इस
ख़ुदा-ए-कहरस
निकलना
हैं
चूम
लूँ
हाथ
बे-
खौफ
उस
के
बस
ऐ
वबा
तेरे
डर
से
निकलना
हैं
रात
के
ख़्वाब
जो
याद
देती
हैं
बस
मुझे
उस
सहरस
निकलना
हैं
याद
कूचा
-ए-
जाँ
पाँव
को
आए
अब
मुझे
इस
शहरस
निकलना
हैं
तू
हैं
'दीदार'
,
वो
मुंतज़िर
फिर
भी
?
बद-अहद
इस
नजर
से
निकलना
हैं
Read Full
Amol
Download Image
2 Likes
उसकी
जो
दी
घड़ी
पहनना
छोड़ा
हैं
वक़्त
जैसे
गुज़रना
तो
भुल
ही
गया
Amol
Send
Download Image
2 Likes
फासलों
से
जो
सँभाले
हैं
रखा
इक
शख़्स
को
टूट
जाता
जो
मिरी
आग़ोश
में
आता
कभी
Amol
Send
Download Image
3 Likes
और
फिर
उस
ने
कहाँ
सब
भूल
जाना
ये
मगर
बोला
नहीं
कब
भूल
जाना
याद
वो
बे-इंतिहा
आने
लगा
था
जिस
दफ़ा
उस
ने
कहाँ
अब
भूल
जाना
इक
तरफ़
बारिश
में
तेरी
याद
आना
इक
तरफ़
हैं
ख़ुश्क
दो
लब
भूल
जाना
चाहते
हो
गर
मदद
मुफ़्लिस
की
करना
याद
रखना
अपना
मज़हब
भूल
जाना
हर
इबादत
में
जिसे
माँगा
हैं
तुझ
सेे
हैं
बड़ा
मुश्किल
उसे,
रब
भूल
जाना
Read Full
Amol
Download Image
1 Like
भुल
गया
हैं
तू
मुझे
पूरी
तरह
से
याद
करने
में
तुझे
क्या
मसअला
अब
Amol
Send
Download Image
1 Like
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Ghar Shayari
Taj Mahal Shayari
Aawargi Shayari
Raqeeb Shayari
Aankhein Shayari