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Aqib khan
kah to diya hai tumne har koi matlabi hai
kah to diya hai tumne har koi matlabi hai | कह तो दिया है तुमने हर कोई मतलबी है
- Aqib khan
कह
तो
दिया
है
तुमने
हर
कोई
मतलबी
है
इस
लिस्ट
में
भी
तुम
ही
अव्वल
हो
ये
बताओ
- Aqib khan
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बैठे
बैठे
फेंक
दिया
है
आतिश-दान
में
क्या
क्या
कुछ
मौसम
इतना
सर्द
नहीं
था
जितनी
आग
जला
ली
है
Zulfiqar aadil
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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न
रूई
हो
तो
अपने
अश्कों
से
बाती
बनाएँगे
बुझा
दीया
हमारा
तो
हवा
से
लड़
भी
जाएँगे
बनाई
रोज़
चौदह
साल
रंगोली
बस
इस
ख़ातिर
न
जाने
रामजी
वनवास
से
कब
लौट
आएंँगे
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Krishnakant Kabk
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दिल
की
ख़ातिर
एक
रिश्ते
को
बचाने
के
लिए
आग
मैंने
ही
लगा
ली
ख़ुद
मिरे
घरबार
में
Shashank Shekhar Pathak
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
भर
को
रुला
दिया
होता
Gulzar
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दुनिया
ने
तजरबात-ओ-हवादिस
की
शक्ल
में
जो
कुछ
मुझे
दिया
है
वो
लौटा
रहा
हूँ
मैं
Sahir Ludhianvi
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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दिया
जला
के
सभी
बाम-ओ-दर
में
रखते
हैं
और
एक
हम
हैं
इसे
रह-गुज़र
में
रखते
हैं
समुंदरों
को
भी
मालूम
है
हमारा
मिज़ाज
कि
हम
तो
पहला
क़दम
ही
भँवर
में
रखते
हैं
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Abrar Kashif
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इक
ओर
तेरा
ख़्वाब
जो
हर
रात
आता
है
दूजा
वो
अपना
वस्ल
जो
हो
ही
नहीं
रहा
Aqib khan
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माँ
के
होने
की
अज़मत
से
हो
तुम
भी
ना
वाक़िफ
क्या
है
ज़िंदगी
बिन
माँ
पूछो
ये
यतीमों
से
Aqib khan
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बेतहाशा
इश्क़
करने
की
सज़ा
मिलनी
ही
थी
सो
तुम्हें
भी
हो
मुबारक
यार
मेरे
बेबसी
Aqib khan
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कौन
किसके
लिए
मरता
है
जहाँ
में
'आकिब'
अपनी
ख़ातिर
ही
मरे
आप
भी
मैं
भी
वो
भी
Aqib khan
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मैं
जाना
चाहता
हूँ
बचपने
में
शुरू
से
सब
शुरू
करना
है
मुझको
Aqib khan
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