sabhi ko hi pa | सभी को ही पड़ी अपने दुखों की

  - Aqib khan
सभीकोहीपड़ीअपनेदुखोंकी
यहाँपरबातहोकिसकेदुखोंकी
कम-अज़-कमदिलसहीसेतोड़जाते
हमेंआदतनहींहल्केदुखोंकी
किसीकेछोड़जानेपरभीख़ुशहो
तुम्हेंपहचानहैअच्छेदुखोंकी
वोमुझसेेदसमिनटमेंभागनिकला
कहानीजानकरमेरेदुखोंकी
हमेशारोनेकोतैयारहैवो
कोईबसबाततोछेड़ेदुखोंकी
कोईदुखमेंहीरोतारहगयाहै
ग़ज़लकहदीहैशा'इरनेदुखोंकी
  - Aqib khan
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