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Aqib khan
dekho kaise baitha hai
dekho kaise baitha hai | देखो कैसे बैठा है
- Aqib khan
देखो
कैसे
बैठा
है
इक
दम
पागल
जैसा
है
जाने
क्या
क्या
सोचे
है
खोया
खोया
रहता
है
सबको
अच्छा
लगता
है
सबको
धोका
देता
है
बाहर
ख़ुश
ख़ुश
दिखता
है
भीतर
रोता
रहता
है
कैसा
ये
पागलपन
है
ख़ुद
को
पागल
कहता
है
कभी
कभी
तो
लगता
है
मर
जाना
ही
अच्छा
है
- Aqib khan
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इतने
अफ़सुर्दा
नहीं
हैं
हम
कि
कर
लें
ख़ुद-कुशी
और
न
इतने
ख़ुश
कि
सच
में
मरने
की
ख़्वाहिश
न
हो
Charagh Sharma
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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हल्की-हल्की
सी
हँसी,
साफ
इशारा
भी
नहीं
जान
भी
ले
गए
और,
जान
से
मारा
भी
नहीं
Sawan Shukla
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चला
तो
हूँ
मैं
उन
के
दर
से
बिगड़
कर
हँसी
आ
रही
है
कि
आना
पड़ेगा
Khumar Barabankvi
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
Mehshar Afridi
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नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
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Jaun Elia
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छूटने
वाले
तो
मुड़कर
ही
खड़े
रहते
हैं
छोड़ने
वाले
पलटकर
नहीं
देखा
करते
Aqib khan
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चश्म
दिखते
ये
जो
विराने
हैं
उसकी
यादों
के
क़ैदखाने
हैं
फिर
भटकते
भटकते
हम
दोनों
एक
ही
रास्ते
पे
आने
हैं
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Aqib khan
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अच्छी-ख़ासी
लग
रही
थी
वो
मुझे
क्यूँँ
ही
देखा
उसको
मेक-अप
के
बिना
Aqib khan
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बनी
बनाई
ही
ढा
रहा
था
ये
कैसी
दुनिया
बना
रहा
था
बड़ा
सितम
था
कि
दिल
मकाँ
पर
जो
आ
रहा
था
वो
जा
रहा
था
फ़रेब
ओ
धोकों
के
इस
जहाँ
में
निभाने
वाला
निभा
रहा
था
कोई
तो
ढूँढो
कहाँ
गया
वो
वही
जो
अपना
बता
रहा
था
किसी
के
दिल
से
गया
निकाला
किसी
के
रस्ते
में
आ
रहा
था
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Aqib khan
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मैं
जानता
हूँ
साँप
है
पर
आस्तीं
में
रह
हम
सेे
नया
न
कोई
भी
अब
पाला
जाएगा
Aqib khan
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