rooth ke mujhse ghar ke dwaare baithi hai | रूठ के मुझ सेे घर के द्वारे बैठी है

  - Afzal Ali Afzal
रूठकेमुझसेेघरकेद्वारेबैठीहै
गालफुलाकरप्यारेप्यारे,बैठीहै
अपनेकमरेमेंख़ामोशखड़ेहैंहम
औरतन्हाईबालसँवारेबैठीहै
छूटरहाहैउम्मीदोंकादामनअब
नाउम्मीदीपाँवपसारेबैठीहै
सोचाथाबाहरखानेपरजाएँगे
परवोमूंगकीदालबघारेबैठीहै
चुपबैठेहैंरेलकीखिड़कीसेलगकर
औरउदासीसाथहमारेबैठीहै
बैठेहैंचुपचापअकेलेहमइसपार
इकदुनियाउसपारकिनारेबैठीहै
  - Afzal Ali Afzal
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