raat jaise azaabon si naazil hui | रात जैसे 'अज़ाबों सी नाज़िल हुई

  - Afzal Ali Afzal
रातजैसे'अज़ाबोंसीनाज़िलहुई
नींदहमकोसराबोंसीहासिलहुई
हाएग़ुरबतमेंक्यादौरआयाख़ुदा
ज़िन्दगीकिसक़दरपुरमसाइलहुई
शबगुज़ारीतेरेहीख़यालोंमेंकल
फिरसहरभीतिरीऔरमाइलहुई
मुझकोइकपलआयाबिछड़केक़रार
तुझकोभीतोजमीअतहासिलहुई
हिचकियोंनेबहुतहीपरेशांकिया?
जी!बहुतमअ'ज़रत,तुमकोमुश्किलहुई
इत्रकीशीशियांढुलगईहोकहीं
तेरीख़ुशबूयूँँसांसोंमेंशामिलहुई
अबमोहब्बतकामज़हबभीढूँढेहैंलोग
याख़ुदातेरीयेदुनियाज़ाहिलहुई
  - Afzal Ali Afzal
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