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Afzal Ali Afzal
dil ko mere bas yahii malaal hai
dil ko mere bas yahii malaal hai | दिल को मेरे बस यही मलाल है
- Afzal Ali Afzal
दिल
को
मेरे
बस
यही
मलाल
है
हिज्र
अपने
दरमियाँ
बहाल
है
दिल
ये
बूढ़ा
ग़म
से
क्यूँँ
निढाल
है
क्या
मोहब्बतों
का
ये
ज़वाल
है
पगड़ियों
से
हैं
बंधे
हुए
क़दम
और
पगड़ियों
का
ही
ख़याल
है
ऐसे
घाव
दे
दिए
हैं
इश्क़
ने
रूह
तक
भी
ख़ून-ए-दिल
से
लाल
है
ग़म
की
धुन
पे
रक़्स
करती
ज़िन्दगी
धड़कनों
का
शोर
देता
ताल
है
हाए
रुख़
पे
माहताब
सा
है
नूर
और
उस
पे
ज़ेर-ए-लब
जो
ख़ाल
है
पी
के
जाम
शेख़
जी
बता
रहे
क्या
है
शिर्क
और
क्या
हलाल
है
पहले
इश्क़
देता
है
सुकून
फिर
लाख
तोहमतों
का
एक
जाल
है
जान
देता
है
तो
दे
कोई
मगर
किस
को
यां
किसी
का
अब
ख़याल
है
ये
किधर
से
आ
रहा
है
माहताब
उस
का
घर
तो
जानिब-ए-शुमाल
है
- Afzal Ali Afzal
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ये
जो
हिजरत
के
मारे
हुए
हैं
यहाँ
अगले
मिसरे
पे
रो
के
कहेंगे
कि
हाँ
Ali Zaryoun
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तुम्हारा
हिज्र
मना
लूँ
अगर
इजाज़त
हो
मैं
दिल
किसी
से
लगा
लूँ
अगर
इजाज़त
हो
Jaun Elia
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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आई
होगी
किसी
को
हिज्र
में
मौत
मुझ
को
तो
नींद
भी
नहीं
आती
Akbar Allahabadi
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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हिज्र
में
ख़ुद
को
तसल्ली
दी
कहा
कुछ
भी
नहीं
दिल
मगर
हँसने
लगा
आया
बड़ा
कुछ
भी
नहीं
Afkar Alvi
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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ख़ुदा
करे
कि
तिरी
उम्र
में
गिने
जाएँ
वो
दिन
जो
हम
ने
तिरे
हिज्र
में
गुज़ारे
थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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उस
हिज्र
पे
तोहमत
कि
जिसे
वस्ल
की
ज़िद
हो
उस
दर्द
पे
ला'नत
की
जो
अशआ'र
में
आ
जाए
Vipul Kumar
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वक़्त
कैसे
वो
काटता
होगा
ग़म
ये
उस
को
भी
खा
रहा
होगा
हिज्र
की
रात
फिर
नहीं
कटती
आज
फिर
यानी
रत
जगा
होगा
तुझ
को
हँस-हँस
के
याद
करता
हूँ
कोई
मुझ
सा
भी
याँ
बता
होगा
शबे
ज़ुल्मत
में
रौशनी
के
लिए
सिर्फ़
मुफ़लिस
का
घर
जला
होगा
अपने
हाथों
में
थाम
कर
चेहरा
क्या
जबीं
वो
भी
चूमता
होगा?
उसको
पहरों
यूँँ
याद
करने
से
ज़ख़्म-ए-दिल
और
भी
हरा
होगा
ज़ात
मज़हब
को
छोड़
कर
अफ़ज़ल
क्या
कभी
भी
कोई
मिरा
होगा?
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Afzal Ali Afzal
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कुछ
तो
करें
कि
दिल
ये
कहीं
और
जा
लगे
कुछ
देर
के
लिए
सही
आँखों
को
चैन
हो
Afzal Ali Afzal
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सीने
में
मेरे
दिल
है,
पर
अब
उस
में
तू
नहीं
यानी
तिजोरी
तो
है
मगर
धन
नहीं
बचा
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Afzal Ali Afzal
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दूजों
का
दुख
समझने
को
बे
हद
ज़रूरी
है
थोड़ी
सही
प
दिल
में
अज़ीयत
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
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