kya hi mil jaayega tum ko mujhe tadpaane se | क्या ही मिल जाएगा तुम को मुझे तड़पाने से

  - Zohaib Azmi
क्याहीमिलजाएगातुमकोमुझेतड़पानेसे
रोकतेक्यूँहोमुझेअपनेक़रीबआनेसे
शहरवालोंसेकहाउसनेउठाकरपत्थर
कोईरिश्ताहीनहींहैमिरादीवानेसे
जन्नत-ओ-हूरकेक़िस्सोंमेंमुझेउलझाकर
शैख़जीआपकहाँचलदिएमयख़ानेसे
मुँहसेफिरख़ूनउगलताहीफिरेगाशब-भर
गरजोज़ाहिदकभीपीलेमिरेपैमानेसे
येमिराशौक़मुझेआजकहाँलेआया
मेरीमय्यतभीउठीहैतोकुतुब-ख़ानेसे
मेरेहिस्सेमेंजोचादरहैलिखीतूनेख़ुदा
कमपड़जाएकहींपाँवकोफैलानेसे
मुझकोइकख़्वाबनेइतनाहैरुलायाकि'ज़ुहैब'
अबतोडरलगताहैपलकोंकोभीझपकानेसे
  - Zohaib Azmi
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