jashn-e-chiraagaan | "जश्न-ए-चिराग़ाँ"

  - Zaman Zaidi ZAMAN
"जश्न-ए-चिराग़ाँ"
डूबाहुआजोनूरमेंहिन्दोस्तानहै
मंज़रयेदेखरश्क-कुनाआसमानहै
हरसिम्तहैख़ुलूस-ओ-मुहब्बतकीरौशनी
आतीनहींनज़रभीयूँँनफ़रतकीतीरगी
कुछइसतरहसेहोतेहैंअफ़रादहम-ज़बाँ
होकोईतिफ़्ल-ओ-पीर-ओ-जवाँ,सबहैंशादमाँ
इमशबजुदाचिराग़ोंकाहुस्न-ओ-जमालहै
हरइकचिराग़आपमेंहीबे-मिसालहै
नग़्मा-सराहुईहैसितारोंकीअंजुमन
ओढ़ेहैयेज़मींभीउजालोंकापैरहन
विर्द-ए-ज़बाँसभीकेतरानेख़ुशीकेहैं
क़िस्सेसभीकेलबयहाँरौशनीकेहैं
लगताहैऐसाहरसूचिराग़ोंकायेसमाँ
उतरीहुईज़मीनहोजैसेकहकशाँ
  - Zaman Zaidi ZAMAN
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