karo na gham jo tumhaari vo ham-rikaab nahin | करो न ग़म, जो तुम्हारी वो हम-रिकाब नहीं

  - Zaman Zaidi ZAMAN
करोग़म,जोतुम्हारीवोहम-रिकाबनहीं
वोशाहज़ादीहै,यूँँसबकोदस्तियाबनहीं
येहुस्नकाहैतआ'रुफ़,यहीहक़ीक़तभी
वोहुस्नहुस्ननहींहै,जोबा-हिजाबनहीं
अजबहैक़ब्ल-ए-शब-ए-वस्लकैफ़ियतदिलकी
हमेंक़रारनहींहै,उन्हे़ंभीताबनहीं
साक़ी,मय-कदेकेसाथतूफ़नाहोजा
जोतेरीमयसेकोईरिंदफ़ैज़याबनहीं
तिरेसिवामैंग़ज़लमेंकिसेख़िताबकरूँँ
तिरेसिवातोमिराकोईइंतिख़ाबनहीं
जोजाननाहैमुझे,तोमिराकलामपढ़ो
ज़मनजहानकीकोईखुलीकिताबनहीं
  - Zaman Zaidi ZAMAN
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