mile na jab kahii qaraar jaun ko padha karo | मिले न जब कहीं क़रार जौन को पढ़ा करो

  - Zaman Zaidi ZAMAN
मिलेजबकहींक़रारजौनकोपढ़ाकरो
ग़मोंमेंआएगानिखारजौनकोपढ़ाकरो
किताबमेंउसीकीसबनिशानियोंकोदेखकर
रहोतुमयूँँअश्क़बारजौनकोपढ़ाकरो
येचारसूग़ुबारजोयहाँतीरगीकेहैं
हटेंगेवोसभीग़ुबारजौनकोपढ़ाकरो
अगरतुमइंतिज़ारमेंरहोकहींमुब्तला
मिलेगालुत्फ़-ए-इंतिज़ारजौनकोपढ़ाकरो
किशाइरोकीबज़्ममेंमिलेंगीतुमकोइज़्ज़तें
बढ़ेगाहरजगहवक़ारजौनकोपढ़ाकरो
मिरेग़मोंसेआश्नारहोगीमेरीफ़ारेहा
बनाकेज़ुल्फ़-ए-बेक़रारजौनकोपढ़ाकरो
ख़यालमेंहज़ारनामआएँगेज़रूर,पर
सभीकोकरकेदरकिनारजौनकोपढ़ाकरो
इलाजदर्दकाकईदफ़ातलबकियागया
कहाज़मननेबार-बारजौनकोपढ़ाकरो
  - Zaman Zaidi ZAMAN
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