door takzeeb ka farhaad hooñ mirii khaatir | दूर तकज़ीब का फ़रहाद हूँ मेरी ख़ातिर

  - Zaheer Siddiqui
दूरतकज़ीबकाफ़रहादहूँमेरीख़ातिर
हक़कीआवाज़सदाक़तकीऔरशीरींहै
मेरामंसबहैहुसूल-ए-शीरीं
वस्ल-ए-शीरींकेलिएतेशाउठाताहूँमैं
तेशा-ए-अज़्म-ओ-यकींजोअभीकुंदनहीं
सीना-ए-संगअभीख़ुश्कनहीं
हररगसंगमेंइकजूएरवाँपिन्हाँहै
मैंकिफ़रहादहूँरगरगमेंमिरी
शो'ला-ए-क़तरा-ए-ख़ूँजौलाँहै
मेरीगर्दनपेहैसरबारअमानतकीतरह
मेरेहीतेशेसेकटसकताहैलेकिनयेकभी
झुकतोसकताहीनहीं
जुटगएहाथउठेऔरबनेएककमाँ
टूटसकतीनहींहाथोंकीकमाँ
छूटसकतानहींतेशामेरा
इसकीहरज़र्ब-ए-जवाँसेजबतक
रेज़ारेज़ानहींहो
ज़ुल्म-ओ-तकज़ीबकायेकोह-ए-गिराँ
  - Zaheer Siddiqui
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