hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Zafar Siddqui
KHvaab ye jaane kyuuñ mujh ko shab aa ga.e
KHvaab ye jaane kyuuñ mujh ko shab aa ga.e | ख़्वाब ये जाने क्यूँ मुझ को शब आ गए
- Zafar Siddqui
ख़्वाब
ये
जाने
क्यूँ
मुझ
को
शब
आ
गए
प्यासे
लब
पर
मिरे
तेरे
लब
आ
गए
मैं
तो
मदहोश
बाँहों
में
तेरी
हुआ
दिन
मिरे
यानी
अच्छे
ही
अब
आ
गए
- Zafar Siddqui
Download Sher Image
पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ
था
हर
नग़्मा-ए-कृष्ण
बाँसुरी
का
Hasrat Mohani
Send
Download Image
34 Likes
पूछते
हैं
वो
कि
ग़ालिब
कौन
है
कोई
बतलाओ
कि
हम
बतलाएँ
क्या
Mirza Ghalib
Send
Download Image
207 Likes
उस
लब
से
मिल
ही
जाएगा
बोसा
कभी
तो
हाँ
शौक़-ए-फ़ुज़ूल
ओ
जुरअत-ए-रिंदाना
चाहिए
Mirza Ghalib
Send
Download Image
40 Likes
आधी
रात
की
चुप
में
किस
की
चाप
उभरती
है
छत
पे
कौन
आता
है
सीढ़ियाँ
नहीं
खुलतीं
Parveen Shakir
Send
Download Image
26 Likes
सुन
ओ
कहानीकार
कोई
ऐसा
रोल
दे
ऐसे
अदा
करूँं
मेरी
इज़्ज़त
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
Send
Download Image
27 Likes
जब
आँखों
में
लगाता
हूँ
तो
चुपके-चुपके
हंस-हंसकर
तेरी
तस्वीर
भी
कहती
है,
सूरत
ऐसी
होती
है
Dagh Dehlvi
Send
Download Image
28 Likes
वो
हमारा
ग़म
चुरा
कर
ले
गया
साथ
अपने
ले
गया
तस्वीर
भी
Meem Alif Shaz
Send
Download Image
0 Likes
तेरी
तारीफ़
करने
लग
गए
हैं
तेरे
दुश्मन
हमारे
शे'र
सुनके
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
13 Likes
हाथ
टूटें
मैंने
गर
छेड़ी
हों
ज़ुल्फ़ें
आप
की
आप
के
सर
की
क़सम
बाद-ए-सबा
थी
मैं
न
था
Momin Khan Momin
Send
Download Image
33 Likes
सरफ़रोशी
की
तमन्ना
अब
हमारे
दिल
में
है
देखना
है
ज़ोर
कितना
बाज़ू-ए-क़ातिल
में
है
Bismil Azimabadi
Send
Download Image
24 Likes
Read More
यूँँ
कोई
बे
वफ़ा
नहीं
होता
बे
सबब
ही
जुदा
नहीं
होता
आ
गए
लोग
कुछ
मदद
करने
हर
कोई
तो
बुरा
नहीं
होता
किस
घड़ी
किस
को
मौत
आ
जाए
ये
किसी
को
पता
नहीं
होता
जंग
दुश्मन
से
जीत
ली
मैंने
हौसला
हो
तो
क्या
नहीं
होता
ऐसे
रस्ते
पे
चल
पड़ा
हूँ
मैं
ख़त्म
ही
रास्ता
नहीं
होता
Read Full
Zafar Siddqui
Download Image
1 Like
कितने
प्यारे
हैं
ये
सुहाने
ख़त
पढ़
रहा
हूँ
तिरे
पुराने
ख़त
ख़त
के
लफ्ज़ों
में
है
तिरी
ख़ुशबू
चूमता
रहता
हूँ
सुहाने
ख़त
नींद
भी
फिर
सुहानी
आती
है
जब
भी
पढ़ता
हूँ
मैं
पुराने
ख़त
मैं
भुलाना
तो
चाहता
हूँ
तुझे
पर
नहीं
देते
हैं
भुलाने
ख़त
इश्क़
रुस्वा
न
होने
दूँगा
मैं
ये
किसी
को
नहीं
दिखाने
ख़त
याद
उसकी
ज़फर
सताती
है
देखता
जब
भी
हूँ
पुराने
ख़त
Read Full
Zafar Siddqui
Download Image
0 Likes
यूँँ
सितम
उसने
माँ
पे
ढाया
है
माँ
के
ज़ेवर
ही
बेच
आया
है
चापलूसी
है
करता
बीवी
की
और
माँ
को
फ़क़त
सताया
है
Read Full
Zafar Siddqui
Send
Download Image
0 Likes
देख
ली
उसकी
ये
हुनर
मंदी
उस
ने
दिल
को
बना
लिया
बंदी
ये
समर
ये
शज़र
हवा
ठंडी
ख़ूब-तर
शान
है
ख़ुदावंदी
सोचता
हूँ
निकाह
कर
डालूँ
चाहिए
बस
तेरी
रज़ा
मंदी
झूठ
पर
झूठ
बोलते
रहना
सच
पे
लागू
यहाँ
है
पाबंदी
सर
झुका
कर
ज़फर
वो
चलते
हैं
जिनकी
नज़रों
में
है
हया
मंदी
Read Full
Zafar Siddqui
Download Image
0 Likes
मिल
रहा
है
गले
ज़फ़र
दुश्मन
ईद
ऐसी
बहार
लाई
है
Zafar Siddqui
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Vishal Singh Tabish
Iftikhar Arif
Jaleel Manikpuri
Haseeb Soz
Abhishar Geeta Shukla
Ibn E Insha
Nazeer Banarasi
Muneer Niyazi
Iftikhar Naseem
Iqbal Ashhar
Get Shayari on your Whatsapp
Nazakat Shayari
Aasra Shayari
Freedom Shayari
Jeet Shayari
Pandemic Shayari