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Zeeshan kaavish
sabhi padhte rahe chehra hamaara
sabhi padhte rahe chehra hamaara | सभी पढ़ते रहे चेहरा हमारा
- Zeeshan kaavish
सभी
पढ़ते
रहे
चेहरा
हमारा
किसी
ने
दिल
नहीं
देखा
हमारा
वो
हमको
हर
तरह
से
भा
गया
है
जिसे
भाया
नहीं
चेहरा
हमारा
- Zeeshan kaavish
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दूसरों
पर
अगर
तब्सिरा
कीजिए
सामने
आइना
रख
लिया
कीजिए
Khumar Barabankvi
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रोना
हो
आसान
हमारा
इतना
कर
नुक़्सान
हमारा
बात
नहीं
करनी
तो
मत
कर
चेहरा
तो
पहचान
हमारा
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Shariq Kaifi
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शदीद
गर्मी
में
कैसे
निकले
वो
फूल-चेहरा
सो
अपने
रस्ते
में
धूप
दीवार
हो
रही
है
Shakeel Jamali
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तेरा
चेहरा
सुब्ह
का
तारा
लगता
है
सुब्ह
का
तारा
कितना
प्यारा
लगता
है
तुम
से
मिल
कर
इमली
मीठी
लगती
है
तुम
से
बिछड़
कर
शहद
भी
खारा
लगता
है
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Kaif Bhopali
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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दर्द
चेहरा
पहन
के
आया
था
तेरा
चेहरा
था
सो
क़ुबूल
किया
Aslam Rashid
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तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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आइना
क्यूँँ
ख़रीद
कर
रक्खें
जब
सँवरने
का
दिल
नहीं
करता
इश्क़
ही
था
जो
दिल
से
करते
थे
वो
भी
करने
का
दिल
नहीं
करता
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Mohit Dixit
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चश्म
हो
तो
आईना-ख़ाना
है
दहर
मुँह
नज़र
आता
है
दीवारों
के
बीच
Meer Taqi Meer
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उम्र
गुज़री
उसका
चेहरा
देखते
और
जी
लेते
तो
दुनिया
देखते
Vipul Kumar
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ऐसी
हालत
नहीं
हुई
होती
गर
मुहब्बत
नहीं
हुई
होती
ज़िंदगी
किस
तरह
बसर
करते
तेरी
चाहत
नहीं
हुई
होती
हम
दीवानों
पे
वो
ही
हँसता
है
जिसको
उल्फ़त
नहीं
हुई
होती
रफ़्ता
रफ़्ता
तुझे
भुलाते
अगर
तेरी
आदत
नहीं
हुई
होती
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Zeeshan kaavish
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सच
मान
जैसा
चाहा
था
वैसा
नहीं
मिला
कोई
भी
इस
जहान
में
तुझ
सेा
नहीं
मिला
Zeeshan kaavish
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उसी
दम
तक
समझ
लेना
तेरी
पहचान
बाक़ी
है
कि
जब
तक
रूह
में
कुछ
गर्मी
ऐ
ईमान
बाक़ी
है
ये
कह
दो
नफरतों
की
आंधियों
से
होश
में
रहना
मेरे
दिल
में
मुहब्बत
का
अभी
तूफ़ान
बाक़ी
है
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Zeeshan kaavish
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वो
मुहब्बत
का
तलबगार
नहीं
हो
सकता
जो
सितमगर
है
उसे
प्यार
नहीं
हो
सकता
तेरे
होते
हुए
जो
चाँद
का
दीदार
करे
कुछ
भी
होगा
वो
समझदार
नहीं
हो
सकता
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Zeeshan kaavish
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दर
से
उठते
हैं
तो
दीवार
से
लग
जाते
हैं
इक
झलक
उनकी
मगर
देख
नहीं
पाते
हैं
Zeeshan kaavish
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