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Zeeshan kaavish
apne dil se meri yaadon ko haTaane vaala
apne dil se meri yaadon ko haTaane vaala | अपने दिल से मेरी यादों को हटाने वाला
- Zeeshan kaavish
अपने
दिल
से
मेरी
यादों
को
हटाने
वाला
क्या
मुझे
भूल
गया
मुझको
भुलाने
वाला
मुझको
पीने
की
तमन्ना
तो
बहुत
है
लेकिन
कोई
मिलता
नहीं
आँखों
से
पिलाने
वाला
- Zeeshan kaavish
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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हमने
वतन
के
वास्ते
क्या
ख़ूब
लिख
दिया
हमने
वतन
को
अपना
ही
महबूब
लिख
दिया
Zeeshan kaavish
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ऐसी
हालत
नहीं
हुई
होती
गर
मुहब्बत
नहीं
हुई
होती
ज़िंदगी
किस
तरह
बसर
करते
तेरी
चाहत
नहीं
हुई
होती
हम
दीवानों
पे
वो
ही
हँसता
है
जिसको
उल्फ़त
नहीं
हुई
होती
रफ़्ता
रफ़्ता
तुझे
भुलाते
अगर
तेरी
आदत
नहीं
हुई
होती
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Zeeshan kaavish
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कभी
फूलों
से
कहता
है
कभी
भॅवरों
से
कहता
है
कभी
ये
दिल
मेरा
चुप
चाप
ही
हर
दर्द
सहता
है
यक़ीं
मानो
मैं
अपना
राज़
ए
दिल
तुम
को
बताता
हूँ
जो
मेरे
दिल
का
दुश्मन
है
वो
मेरे
दिल
में
रहता
है
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Zeeshan kaavish
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तुझ
सेे
बिछडूँगा
तो
पागल
नहीं
होने
वाला
हाँ
मगर
सच
है
मुकम्मल
नहीं
होने
वाला
कोई
नुक़सान
नहीं
होगा
उसे
पाने
में
वो
खरा
सोना
है
पीतल
नहीं
होने
वाला
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Zeeshan kaavish
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तेरी
यादों
को
मिटा
सकते
हैं
हर
तरफ़
फूल
खिला
सकते
हैं
तुझको
गर
भूलने
पे
आएँ
हम
इक
ही
लम्हे
में
भुला
सकते
हैं
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Zeeshan kaavish
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