umeed-o-yaas men shab jal rahi hai | उमीद-ओ-यास में शब जल रही है

  - Yawar Diwana
उमीद-ओ-यासमेंशबजलरहीहै
महज़इकसाँसहैजोचलरहीहै
मैंआईनाखुरचकरढूँढताथा
अजबबे-चेहरगीसीकलरहीहै
जिसेतुमआलिमाबतलारहेहो
येअपनेहालमेंपागलरहीहै
शफ़क़कीज़ुल्फ़बिखरीआसमाँपर
वोरश्क-ए-जामआँखेंमलरहीहै
मुझेआज़ादकरदेतूदु'आसे
मुझेयेदीन-दारीखलरहीहै
हैवीरानाबपादिल-अंजुमनमें
जहाँतेरीग़रज़अव्वलरहीहै
  - Yawar Diwana
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