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Yashvardhan Mishra 'Hind'
jab chala mausam hamaare saath men
jab chala mausam hamaare saath men | जब चला मौसम हमारे साथ में
- Yashvardhan Mishra 'Hind'
जब
चला
मौसम
हमारे
साथ
में
आ
गया
आलम
हमारे
साथ
में
जाम
सिगरेट
हिज्र
ख़ल्वत
और
ग़म
है
यही
मरहम
हमारे
साथ
में
इश्क़
में
धोखा
उसे
ऐसा
मिला
मर
गया
आदम
हमारे
साथ
में
पास
रहता
है
मेरे
हर
दम
तिरी
याद
का
एल्बम
हमारे
साथ
में
एक
कुर्सी
और
ले
आओ
ज़रा
आ
गया
है
ग़म
हमारे
साथ
में
एक
तू
जब
तक
रहा
ऐसा
लगा
है
कोई
संगम
हमारे
साथ
में
- Yashvardhan Mishra 'Hind'
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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खड़ा
हूँ
आज
भी
रोटी
के
चार
हर्फ़
लिए
सवाल
ये
है
किताबों
ने
क्या
दिया
मुझ
को
Nazeer Baaqri
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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तकल्लुफ़
छोड़कर
आओ
उसे
फिर
से
जिया
जाए
हमारा
बचपना
जो
एल्बमों
में
क़ैद
रहता
है
Shiva awasthi
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शब
की
आग़ोश
में
महताब
उतारा
उस
ने
मेरी
आँखों
में
कोई
ख़्वाब
उतारा
उस
ने
Azm Shakri
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इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
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यारों
घर
पर
तो
अपना
आना
जाना
चलता
है
फिर
क्यूँ
मुझ
को
अपना
कमरा
वीराना
खलता
है
वो
निकला
तो
ऐसे
निकला
मेरे
दिल
से
लेकिन
अब
तक
मेरे
सीने
का
बायाँ
हिस्सा
जलता
है
मम्मी
की
दो
रोटी
में
भी
बॉडी
बन
जाती
थी
बाहर
चाहे
जितना
खा
लें
पर
ढांँचा
गलता
है
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Yashvardhan Mishra 'Hind'
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आज
निकले
हैं
तिरे
दीदार
को
तू
गिरा
दे
शर्म
की
दीवार
को
वो
अगर
तस्वीर
अपनी
भेज
दें
फ़ील
मिलता
फिर
सही
बीमार
को
शहर
जिस
दिन
मैं
चला
फिर
ले
लिया
मैंने
अपने
साथ
घर
के
प्यार
को
याद
हम
को
है
अभी
भी
वो
घड़ी
मैंने
छोड़ा
था
अना
में
चार
को
फ़ोन
नंबर
और
फ़ोटो
सब
दिया
ब्लॉक
जाने
क्यूँ
किया
फिर
यार
को
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तुम्हारी
याद
क्या
आई
ज़रा
सी
चमक
चेहरे
पे
फ़ौरन
आ
गई
फिर
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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अब
तो
उसकी
याद
भी
आती
नहीं
है
फूल
रक्खा
है
अभी
तक
मैंने
जिस
का
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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तुम्हारे
बिन
नहीं
लेते
कभी
करवट
अकेले
हम
तुम्हारी
याद
भी
करवट
हमारे
साथ
लेती
है
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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