ख़ुदहीसंग-ओ-ख़िश्तख़ुदहीसर-जुनून-ए-सरहूँमैं
ख़ुदहीमैंनख़चीरदानाख़ुदहीबाल-ओ-परहूँमैं
मुंतज़िरहूँएकक़तरेकाजोदेइज़्न-ए-सफ़र
जोतह-ए-सहराहैमहव-ए-ख़्वाबवोसागरहूँमैं
चाँदकोआबादकरलेकिनमेरीफ़िक्र-ओ-नज़र
देखमुद्दतसेहैजोवीराँपड़ावोघरहूँमैं
इतनासादा-दिलकिदर्द-ए-दिलकेहक़मेंजानदूँ
परदर-ए-का'बानजाऊँइसक़दरख़ुद-सरहूँमैं
इसक़दरवहशीकिख़ुदपीजाऊँअपनाख़ून-ए-दिल
इतनाशाइस्ताकिशहर-ए-इश्क़कादिलबरहूँमैं
तिश्ना-लबपरकुछअदबवाजिबनहींदरियाओंका
येसबबहैजोरिवायतसेखड़ाबाहरहूँमैं
चि
यूँँटियोंकेरेंगनेकीभीसदाआएजहाँ
इतनेचुपसह
मेंनगरमेंज़र्बआहन-गरहूँमैं
इसक़दरतन्हाकिडरजाताहूँअपनीसाँससे
इतनापेचीदाकिअपनीज़ातमेंलश्करहूँमैं
साँसआतीभीनहींऔरजाँसेजातीभीनहीं
हिज्रबाहरथातोहिजरतदर्दकेअंदरहूँमैं
चंदघड़ियाँऔरहैयेहब्सकामौसम'फ़क़ीह'
रुख़हवाकादेखसकताहैजोदीदा-वरहूँमैं