main kya hooñ mujhe tum ne jo aazaar pe kheecha | मैं क्या हूँ मुझे तुम ने जो आज़ार पे खींचा

  - Ahmad Faqih
मैंक्याहूँमुझेतुमनेजोआज़ारपेखींचा
दुनियानेमसीहाओंकोभीदारपेखींचा
ज़िंदोंकातोमस्कनभीयहाँक़ब्र-नुमाहै
मुर्दोंकोमगरदर्जा-ए-अवतारपेखींचा
वोजातारहाऔरमैंकुछबोलपाया
चिड़ियोंनेमगरशोरसादीवारपेखींचा
कुछभीबचाशहरमेंजुज़रोनेकीरुतके
हरशोला-ए-आवाज़कोमल्हारपेखींचा
यूसुफ़कभीनीलामहुआकरताथालेकिन
यूसुफ़कोभीइसशहरनेहैदारपेखींचा
फूटेहैंमेरेदिलमेंफिरइंकारकेसोते
फिरदिलनेमुझेहालत-ए-दुश्वारपेखींचा
हरशयकीहक़ीक़तमेंउतरजाएँअबआँखें
ज़ुल्मतनेमुझेदीदा-ए-बेदारपेखींचा
दुखआलम-ए-इंसानकेथेजोवोछुपाए
ख़तचाँदकोसरकरनेकाअख़बारपेखींचा
तुमनेतो'फ़क़ीह'अपनीअनाकसकेमुझेभी
पैकाँकीतरहहालत-ए-पैकारपेखींचा
  - Ahmad Faqih
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