tumhaari raah men miTTi ke ghar nahin aate | तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते

  - Waseem Barelvi
तुम्हारीराहमेंमिट्टीकेघरनहींआते
इसीलिएतोतुम्हेंहमनज़रनहींआते
मोहब्बतोंकेदिनोंकीयहीख़राबीहै
येरूठजाएँतोफिरलौटकरनहींआते
जिन्हेंसलीक़ाहैतहज़ीब-ए-ग़मसमझनेका
उन्हींकेरोनेमेंआँसूनज़रनहींआते
ख़ुशीकीआँखमेंआँसूकीभीजगहरखना
बुरेज़मानेकभीपूछकरनहींआते
बिसात-ए-इश्क़पेबढ़नाकिसेनहींआता
येऔरबातकिबचनेकेघरनहींआते
'वसीम'ज़ेहनबनातेहैंतोवहीअख़बार
जोलेकेएकभीअच्छीख़बरनहींआते
  - Waseem Barelvi
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