kyuuñ khud ko tu rakhta hai yuñ patthar sa banaa kar | क्यूँ ख़ुद को तू रखता है यूँँ पत्थर सा बना कर

  - Wajid Husain Sahil
क्यूँख़ुदकोतूरखताहैयूँँपत्थरसाबनाकर
चलबज़्ममेंयारोंकीकभीहँसभीलियाकर
वोदिलचुरालेकहींसीनेसेलगाकर
तूहल्क़ा-ए-याराँमेंभीमोहतातरहाकर
तेरेसिवाकोईभीदिखाईदेमुझको
यारबमिरीआँखोंकोसिफ़तऐसीअताकर
वोशख़्सजोनज़रोंसेबहुतदूरहैलेकिन
पहरोउसेतकताहूँमैंख़्वाबोंमेंबुलाकर
दिलसेमिरीयादोंकामिटानातोअलगबात
नंबरहीमिराफ़ोनसेदिखलादेमिटाकर
साहिलजिसेकहतेहैंतकी़मीरभीभारी
देखूँगाकिसीरोज़वोपत्थरभीउठाकर
  - Wajid Husain Sahil
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy