chaah paane kii nahin khone ka kuchh dar bhi nahin | चाह पाने की नहीं खोने का कुछ डर भी नहीं

  - Wajid Husain Sahil
चाहपानेकीनहींखोनेकाकुछडरभीनहीं
ग़मजुदाईकामुझेरत्तीबराबरभीनहीं
नीमऔरबरगदनहींसड़केहैंपीपरभीनहीं
फिरकहाॅंजाऍंपरिंदोंकेकोईघरभीनहीं
जबसेउसकाहोगयाफिरमैंकहाॅंबाक़ीरहा
लोगबाहरढूँढतेहैंमैंतोअंदरभीनहीं
जीमैंआताहैउसेबंदीबनालूॅंख़्वाबमें
परमिरीआँखोंमेंतोरुकतावोपलभरभीनहीं
शोहरतेंइंसानकोपंछीबनादेतीहैंक्या
वोभीउड़तेहैंहवामेंजिनकेतोपरभीनहीं
जीतेजीतमग़ोंसेशायदकुछभलाहोतामगर
क्याकरेंदस्तारकाजबजिस्मपेसरभीनहीं
किसक़दरइसदौरकीरंगीनियोंमेंखोगए
हमकोअबअस्लाफ़केपैग़ामअज़बरभीनहीं
अबहरमकीपासबानीआपख़ुदहीकीजिए
अबअबाबीलोकेलश्करऔरकंकरभीनहीं
हालक्याबतलाऊॅंमैंदिलकेलुटेऐवानका
"इतनावीराँतोमज़ारोंकामुक़द्दरभीनहीं"
मेरीआमदसेभलाक्यूँआइनेडरनेलगे
मेरेहाथोंमेंतोसाहिलकोईपत्थरभीनहीं
  - Wajid Husain Sahil
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