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Wajahat Husain Wajahat
kya kahooñ tum se baat jaade ki
kya kahooñ tum se baat jaade ki | क्या कहूँ तुम से बात जाड़े की
- Wajahat Husain Wajahat
क्या
कहूँ
तुम
से
बात
जाड़े
की
लंबी
होती
है
रात
जाड़े
की
नींद
इक
बार
जब
उचटती
है
बड़ी
मुश्किल
से
रात
कटती
है
लोग
आँखों
को
बंद
करते
हैं
जागना
ना-पसंद
करते
हैं
ख़ूब
करवट
पे
लेते
हैं
करवट
नींद
आए
किसी
तरह
झट-पट
वो
कभी
ओढ़ना
रज़ाई
का
वाह
क्या
कहना
इस
सफ़ाई
का
है
ये
मतलब
कि
जी
न
घबराए
चैन
से
सोएँ
नींद
आ
जाए
मगर
ऐसी
घड़ी
उड़ी
थी
नींद
सुब्ह
तक
फिर
ज़रा
न
आई
नींद
बन
सँवर
कर
बहुत
पड़े
लेकिन
जागते
जागते
चढ़
आया
दिन
मस्जिदों
में
अज़ान
होने
लगी
जल्वा-गर
दिन
की
शान
होने
लगी
मुर्ग़
अब
बोलते
हैं
कुकड़ूँ
कूँ
और
कबूतर
भी
करते
हैं
ग़ट
गूँ
क्या
सबब
नींद
क्यूँ
उचटती
है
रात
क्यूँ
मुश्किलों
से
कटती
है
बात
ये
है
जो
हैं
निकम्में
लोग
काम
का
पालते
नहीं
हैं
रोग
उन
को
मतलब
नहीं
किताबों
से
रात
को
वो
सबक़
नहीं
पढ़ते
शाम
ही
से
वो
लेट
रहते
हैं
बात
सुनते
हैं
और
न
कहते
हैं
लंबी
होती
है
रात
जाड़ों
की
नींद
भर
कर
है
आँख
खुल
जाती
जाग
कर
फिर
वो
सुब्ह
करते
हैं
जैसी
करते
हैं
वैसी
भरते
हैं
- Wajahat Husain Wajahat
हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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सात
टुकड़े
हुए
मेरे
दिल
के
एक
हफ़्ता
लगा
सँभलने
में
Tanoj Dadhich
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अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
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