ruksat-e-nutq zabaanon ko riya kya degi | रुख़्सत-ए-नुत्क़ ज़बानों को रिया क्या देगी

  - Waheed Akhtar
रुख़्सत-ए-नुत्क़ज़बानोंकोरियाक्यादेगी
दर्सहक़-गोईकायेबिंत-ए-ख़ताक्यादेगी
सज्दाकरतीहैलईमोंकेदरोंपरदुनिया
बे-नियाज़ोंकोयेबे-शर्मभलाक्यादेगी
यहीहोगाकिआएगीकभीघरमेरे
मुझकोदुनिया-ए-दुनीऔरसज़ाक्यादेगी
साल-हा-सालकेतूफ़ाँमेंभीदिलबुझसका
ज़कउसेसरकशी-ए-मौज-ए-हवाक्यादेगी
कोईमौसमहोमहकतेहैंयहाँज़ख़्मकेफूल
मेरेदामनकोतही-दस्तसबाक्यादेगी
दिलतोकुछकहताहैपरशर्मसेउठतेनहींहाथ
देखनाहैकियेबे-दस्तदु'आक्यादेगी
ख़्वाहिश-ए-मर्गहैकुछपानेकीमौहूमउम्मीद
ज़िंदगीदेसकीकुछतोक़ज़ाक्यादेगी
ख़्वाबदेखेहैंतोबेदाररहोउम्रतमाम
चश्म-ए-ख़्वाबीदाकोताबीर-ए-सिलाक्यादेगी
इसीज़िंदानमेंअबकाटदोउम्रअपनी'वहीद'
मैंकहताथातुम्हेंक़ैद-ए-वफ़ाक्यादेगी
  - Waheed Akhtar
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