ye kashmakash-e-mun'im-o-naadaar kahaan tak | ये कश्मकश-ए-मुनइ'म-ओ-नादार कहाँ तक

  - Wafa Siddiqui
येकश्मकश-ए-मुनइ'म-ओ-नादारकहाँतक
सरमाया-ओ-मेहनतकीयेतकरारकहाँतक
टूटेगीज़ुल्मातकीदीवारकहाँतक
उट्ठेगीवोचश्म-ए-सहर-बारकहाँतक
इसशहर-ए-दिल-आज़ारमेंअबदेखनायेहै
रहतीहैयूँँहीयूरिश-ए-आज़ारकहाँतक
ख़ुशनूदी-ए-सय्यादकीख़ातिरयूँँहीयारो
ज़िंदानोंकोकहतेरहेंगुलज़ारकहाँतक
इकरोज़बिल-आख़िरमुझेतस्लीमकरेंगे
झुटलाएँगेमुझकोमिरेअग़्यारकहाँतक
इसतरहतोसरमा'रका-ए-दारहोगा
छानोगे'वफ़ा'कूचा-ए-दिलदारकहाँतक
  - Wafa Siddiqui
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy