firaq-e-yaar men KHud ko tamaam karte hue | फ़िराक़-ए-यार में ख़ुद को तमाम करते हुए

  - Vivek Bijnori
फ़िराक़-ए-यारमेंख़ुदकोतमामकरतेहुए
मैंरोरहाहूँख़ुशीग़मकेनामकरतेहुए
यूँँतेरीयादहैआतीकिजैसेगलियोंसे
बरातगुज़रेकोईधूम-धामकरतेहुए
वहीतोहोताहैहरपलमिरेतख़य्युलमें
मैंशे'रकहताहूँउससेकलामकरतेहुए
मैंक़ैसहूँसोमुझेदश्तमेंहीरहनेदो
नहींजीपाऊँगायेताम-झामकरतेहुए
इश्क़मानलियाथोड़ीअपनीग़लतीथी
ज़रासासोचतोजीनाहरामकरतेहुए
  - Vivek Bijnori
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