nayi ik nazm ka unwaan rakhoon | नई इक नज़्म का उनवान रक्खूँ

  - Vivek Bijnori
नईइकनज़्मकाउनवानरक्खूँ
फिरइसमेंवस्लकेइम्कानरक्खूँ
होमुश्किलजिससेमुझकोमारपाना
किसीचिड़ियामेंअपनीजानरक्खूँ
मिलेकोईजोमेराध्यानरक्खे
मैंउसकाहदसेज़्यादाध्यानरक्खूँ
ज़रादेखूँकिक्याक्याबोलतीहै
किसीदीवारपरयेकानरक्खूँ
बढ़ादूँमुश्किलेंदुनियाकीऐसे
मैंख़ुदकोऔरोंसेआसानरक्खूँ
ख़ुदाहोनातोमुमकिनहीनहींहै
सोबेहतरहैउसेइंसानरक्खूँ
मेरामज़हबहैक्याक्यूँपूछतेहो
मैंपंडितहाथमेंक़ुरआनरक्खूँ
  - Vivek Bijnori
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