ab ham charaaghh ban ke sar-e-raah jal uthe | अब हम चराग़ बन के सर-ए-राह जल उठे

  - Vishvanath Dard
अबहमचराग़बनकेसर-ए-राहजलउठे
देखेंतोकिसतरहसेभटकतेहैंक़ाफ़िले
जोमुंतज़िरथेबातकेमुँहदेखतेरहे
ख़ामोशरहकेहमतोबड़ीबातकहगए
कबमंज़िलोंनेचू
मेंक़दमउनकेहमदमो
हरराहरोकेसाथजोरह-गीरचलपड़े
जानेज़बाँकीबातथीयारंगरूपकी
हमआपअपनेशहरमेंजोअजनबीरहे
वोलोगख़ुश-नसीबथेअपनीनिगाहमें
जोहरकिसीकेशौक़कीख़ुददास्ताँबने
मा'लूमजिनकानाम-ओ-निशाँभीनहींहमें
हमउनकाशहरशहरपतापूछतेफिरे
कहनेकोइकजहाँसेउलझतेरहेमगर
दर्दअपनेसाएसेडरडरकेहमजिए
  - Vishvanath Dard
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