vaqt ki taq pe dono ki sajaai hui raat | वक़्त की ताक़ पे दोनों की सजाई हुई रात

  - Vipul Kumar
वक़्तकीताक़पेदोनोंकीसजाईहुईरात
किसपेख़र्चीहैबतामेरीकमाईहुईरात
औरफिरयूँँहुआआँखोंनेलहूबरसाया
यादआईकोईबारिशमेंबिताईहुईरात
हिज्रकेबनमेंहिरनअपनाभीमेराहीगया
उसरत-ए-रमसेबहर-हालरिहाईहुईरात
तूतोइकलफ़्ज़-ए-मोहब्बतकोलिएबैठाहै
तोकहाँजातीमिरेजिस्मपेआईहुईरात
दिलकोचैनआयातोउठनेलगातारोंकाग़ुबार
सुब्हलेनिकलीमिरेहाथमेंआईहुईरात
औरफिरनींदहीआईकोईख़्वाबआया
मैंनेचाहीथीमिरेख़्वाबमेंआईहुईरात
  - Vipul Kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy