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Kavi Vikash Shukla
baaki ummeed thii aakhiri kaat dii
baaki ummeed thii aakhiri kaat dii | बाकी उम्मीद थी आख़िरी काट दी
- Kavi Vikash Shukla
बाकी
उम्मीद
थी
आख़िरी
काट
दी
हम
थे
जुगनू
सो
सब
तीरगी
काट
दी
तुम
हमारे
थे
ये
एक
भ्रम
था
हमें
बस
इसी
भ्रम
में
ये
ज़िन्दगी
काट
दी
- Kavi Vikash Shukla
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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आज
सड़कों
पर
लिखे
हैं
सैकड़ों
नारे
न
देख
पर
अँधेरा
देख
तू
आकाश
के
तारे
न
देख
Dushyant Kumar
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तस्वीर
में
जो
क़ैद
था
वो
शख़्स
रात
को
ख़ुद
ही
फ़्रेम
तोड़
के
पहलू
में
आ
गया
Adil Mansuri
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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तेरी
आँखों
के
लिए
इतनी
सज़ा
काफ़ी
है
आज
की
रात
मुझे
ख़्वाब
में
रोता
हुआ
देख
Abhishek shukla
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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चाँद
तारे
इक
दिया
और
रात
का
कोमल
बदन
सुब्ह-दम
बिखरे
पड़े
थे
चार
सू
मेरी
तरह
Aziz Nabeel
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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हमारी
याद
आने
पर
अकेली
रात
में
तुम
भी
कभी
पंखा
कभी
टीवी
कभी
दीवार
देखोगे
Ambar
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अँधेरा
खो
गया
है
गाँव
वालों
सवेरा
हो
गया
है
गाँव
वालों
तुम्हें
अब
जागना
ख़ुद
ही
पड़ेगा
ये
मुर्गा
सो
गया
है
गाँव
वालों
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Divy Kamaldhwaj
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है
कठिन
राह
तुम
इस
पे
चलना
नहीं
चाँद
होना
मगर
सुब्ह
ढलना
नहीं
हर
गुलाब
एक
दिन
यूँँ
तो
मुरझाएगा
तुम
मगर
यूँँ
फजा
संग
बदलना
नहीं
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Kavi Vikash Shukla
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माँ
के
हाथों
खाना
खाना
अच्छा
लगता
है
आज
भी
पापा
का
समझाना
अच्छा
लगता
है
जिम्मेदारियाँ
घर
में
रहने
नइँ
देती
वरना
किसको
अपने
घर
से
जाना
अच्छा
लगता
है
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Kavi Vikash Shukla
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हर
दिन
तेरा
रास्ता
देखा
जाएगा
जो
कुछ
कहेगी
दुनिया
देखा
जाएगा
इश्क़
है
तुम
सेे
बस
इतना
कह
लेने
दो
फिर
जो
कुछ
भी
होगा
देखा
जाएगा
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Kavi Vikash Shukla
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कोई
सपने
दिखाने
नहीं
हैं
हमें
ज़ख्में
दिल
भी
मिटाने
नहीं
हैं
हमें
जो
अना
दाव
पर
रख
निभाने
पड़े
ऐसे
रिश्ते
निभाने
नहीं
हैं
हमें
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Kavi Vikash Shukla
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सफ़र
का
सारा
बोझ
उठाया
है
मैंने
रस्तों
को
आसान
बनाया
है
मैंने
उसकी
आँखें
दरिया
हैं
सब
डूब
गए
ख़ुद
को
कितनी
बार
बचाया
है
मैंने
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Kavi Vikash Shukla
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