ab kahaan dard jism-o-jaan men hai | अब कहाँ दर्द जिस्म-ओ-जान में है

  - Vijay Sharma
अबकहाँदर्दजिस्म-ओ-जानमेंहै
दफ़्नहैदिलबदनदुकानमेंहै
दिनढलेरोज़यूँँलगेजैसे
कोईमुझसेामिरेमकानमेंहै
दिलकाकुछभीपतानहींचलता
हाथमेंहैकिआसमानमेंहै
छाँवकेपलजलादिएसारे
उफ़वोसूरजजोसाएबानमेंहै
क्यूँँतश्बीहफूलहोउसकी
वोजोख़ुशबूसादास्तानमेंहै
इकसवालऔर'अर्श'बाक़ीहै
आख़िरीतीरभीकमानमेंहै
  - Vijay Sharma
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