beete vaqt ka chehra dhoondhta rehta hai | बीते वक़्त का चेहरा ढूँढता रहता है

  - Vijay Sharma
बीतेवक़्तकाचेहराढूँढतारहताहै
दिलपागलहैक्याक्याढूँढतारहताहै
ख़ामोशीभीएकसदाहीहैजिसको
सुननेवालागोयाढूँढतारहताहै
शबनमशबनमपिघलीपिघलीयादेंहैं
मेराग़मतोसहराढूँढतारहताहै
उसनेअपनीमंज़िलहासिलकरलीहै
फिरक्यूँँघरकारस्ताढूँढतारहताहै
दिलसबसेमिलताहैहल्केलहजेमें
सबमेंकुछकुछतुझसाढूँढतारहताहै
बेचदियागुल-दानविरासतकाउसने
भाईमिराअबगमलाढूँढतारहताहै
जेबमेंदिलथैलेमेंपत्थरलेकर'अर्श'
शहरकोईदीवानाढूँढतारहताहै
  - Vijay Sharma
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