yuñ bhi katne laga hooñ ab main ghair-munaasib yaaron se | यूँँ भी कटने लगा हूँ अब मैं ग़ैर-मुनासिब यारों से

  - Vashu Pandey
यूँँभीकटनेलगाहूँअबमैंग़ैर-मुनासिबयारोंसे
बारिशवफ़ानहींकरसकतीमिट्टीकीदीवारोंसे
दुखेहुएलोगोंकीदुखतीरगकोछूनाठीकनहीं
वक़्तनहींपूछाकरतेहैंयारोंवक़्तकेमारोंसे
आशिक़हैंतो'आशिक़वालेजलवेभीदिखलाएँआप
कपड़ेफाड़ेंख़ाक़उड़ाएँसरमारेंदीवारोंसे
औरचमनगरअपनाहैतोइसकासबकुछअपनाहै
बेशकफूलपेफूललुटाएँख़ारखाएँख़ारोंसे
  - Vashu Pandey
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