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Vaseem 'Haidar'
ha
ha | हमें उसकी ज़रुरत थी वहाँ यारों,जहाँ हम थे
- Vaseem 'Haidar'
हमें
उसकी
ज़रुरत
थी
वहाँ
यारों,जहाँ
हम
थे
बिछड़ने
से
हमी
रोए
,तिरे
मौसम
यहाँ
कम
थे
- Vaseem 'Haidar'
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मैं
कुछ
दिन
से
अचानक
फिर
अकेला
पड़
गया
हूँ
नए
मौसम
में
इक
वहशत
पुरानी
काटती
है
Liaqat Jafri
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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मैं
सालों
बाद
जब
भी
गाँव
जाता
हूँ
लिए
पीपल
की
ठंडी
छाँव
जाता
हूँ
कहीं
मैली
न
हो
जाए
ये
जन्नत
मैं
माँ
के
पास
नंगे
पाँव
जाता
हूँ
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Ashok Sagar
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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हम
क्या
जानें
जन्नत
कैसी
होती
है
उस
सेे
पूछो
जिसने
तुमको
पाया
है
Harsh saxena
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मिरे
माँ
बाप
जन्नत
से
नज़र
रखते
हैं
मुझ
पर
अब
मिरे
दिल
में
यतीमों
के
लिए
इक
ख़ास
कोना
है
Amaan Pathan
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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कौन
है
जो
मुझे
सुलाए
अब
ये
मोहब्बत
मेरी
निभाए
अब
आस
कोई
नहीं
मुझे
उसकी
कौन
दिल
में
कली
खिलाए
अब
मेरा
वीरान
है
बहुत
हुजरा
कौन
हुजरे
को
फिर
सजाए
अब
मैं
तो
बर्बाद
हो
रहा
हूँ
अब
इक
दिलासा
कोई
दिलाए
अब
मौत
का
मुंतज़िर
बहुत
हूँ
मैं
ज़हर
कोई
मुझे
पिलाए
अब
पहले
ही
मार
डाला
लोगों
ने
ये
जनाज़ा
कोई
उठाए
अब
अब
बुरा
हाल
है
मिरा
यारों
मेरे
घर
में
सो
कौन
आए
अब
दिल
में
किसके
रहूँ
कहाँ
जा
कर
दिल
में
रहने
के
हैं
किराए
अब
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Vaseem 'Haidar'
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नहीं
वो
भूल
पाएगा
मुझे
यारों
वहाँ
मिरी
इक
उम्र
निकली
है
दुआओ
में
यहाँ
Vaseem 'Haidar'
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घर
तुम्हें
अपना
अब
सजाना
है
और
तुम्हें
मुझको
भी
भुलाना
है
मेरे
अपने
सभी
गए
हैं
मर
ये
सभी
को
तुम्हें
बताना
है
अब
मैं
बेशक
यहाँ
पे
मर
जाऊँ
घर
नहीं
तुमको
मेरे
आना
है
अब
उदासी
पे
ओढ़
लो
चादर
उम्र
भर
तुमको
मुस्कुराना
है
तुझको
उसके
हवाले
करके
अब
मुझको
इक
दरिया
पार
जाना
है
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Vaseem 'Haidar'
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उसे
इक
रोज़
मेरी
याद
आएगी
वो
फिर
आँखों
से
आँसू
भी
बहाएगी
भरम
था
ये
मेरे
भीतर
ज़ियादा
ही
बिना
मेरे
वो
खाना
कैसे
खाएगी
बिना
मेरे
न
रह
पाएगी
लड़की
जब
तभी
वो
फ़ोन
हाथों
में
उठाएगी
वहाँ
मैं
छोड़
तो
आऊँ
उसे
लेकिन
बिछड़
के
फिर
कहाँ
वो
लड़की
जाएगी
मैं
तो
बर्बाद
हो
के
आ
गया
हूँ
फिर
वो
लड़की
संग-दिल
किसको
बुलाएगी
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Vaseem 'Haidar'
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रुत
ये
कितनी
यहाँ
सुहानी
है
लड़की
वो
बाहों
में
उठानी
है
चैन
आता
नहीं
है
उसके
बिन
अब
उसे
बात
ये
बतानी
है
तुम
गले
मेरे
क्यूँँ
नहीं
लगते
क्या
बिछड़ने
की
तुमने
ठानी
है
ऐ
ख़ुदा
वो
अमान
में
तेरी
उस
पे
अब
तो
भरी
जवानी
है
कैसे
वो
भूल
सकती
है
मुझको
सोच
कर
आँखों
में
ये
पानी
है
मैं
भी
मरता
था
एक
लड़की
पर
बात
ये
अब
बहुत
पुरानी
है
पहले
जो
मेरी
ही
दिवानी
थी
अब
वो
तो
ग़ैर
की
दिवानी
है
राब्ता
हो
मिरा
ख़ुदास
अब
चोट
दिल
की
उसे
दिखानी
है
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Vaseem 'Haidar'
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