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Vaseem 'Haidar'
ab ishq men har zulm sahna padta hai
ab ishq men har zulm sahna padta hai | अब इश्क़ में हर ज़ुल्म सहना पड़ता है
- Vaseem 'Haidar'
अब
इश्क़
में
हर
ज़ुल्म
सहना
पड़ता
है
नाराज़
हूँ
मैं
उस
से
कहना
पड़ता
है
फ़ुर्सत
नहीं
है
बात
करने
की
उसे
अब
तन्हा
घर
में
मुझको
रहना
पड़ता
है
जब
वो
मेरी
बातें
नहीं
सुनती
कहीं
तब
मेरी
इन
आँखों
को
बहना
पड़ता
है
- Vaseem 'Haidar'
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इक
दिए
से
एक
कमरा
भी
बहुत
है
दिल
जलाने
से
ये
घर
रौशन
हुआ
है
Neeraj Neer
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लोग
कहते
हैं
कि
इस
खेल
में
सर
जाते
हैं
इश्क़
में
इतना
ख़सारा
है
तो
घर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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मौत
न
आई
तो
'अल्वी'
छुट्टी
में
घर
जाएँगे
Mohammad Alvi
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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इश्क़
कहता
है
भटकते
रहिए
और
तुम
कहते
हो
घर
जाना
है
Madan Mohan Danish
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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कहाँ
रोते
उसे
शादी
के
घर
में
सो
इक
सूनी
सड़क
पर
आ
गए
हम
Shariq Kaifi
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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तेरी
यादें
लिपट
जाती
हैं
मुझ
से
घर
पहुँचते
ही
कि
जैसे
बाप
से
आकर
कोई
बच्ची
लिपटती
है
Afzal Ali Afzal
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मैंने
पूछा
नहीं
है
उन्हें
कुछ
वो
मिरे
घर
पे
आए
हुए
हैं
आज
क्यूँ
याद
आई
है
मेरी
लगता
है
वो
सताए
हुए
हैं
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Vaseem 'Haidar'
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ख़्वाहिशों
की
मिरे
ख़ुद-कुशी
हो
गई
उसकी
जाने
कहाँ
दोस्ती
हो
गई
गाँव
में
एक
दिन
के
लिए
आई
थी
वो
तभी
से
मिरी
ज़िंदगी
हो
गई
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Vaseem 'Haidar'
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रुत
ये
कितनी
यहाँ
सुहानी
है
लड़की
वो
बाहों
में
उठानी
है
चैन
आता
नहीं
है
उसके
बिन
अब
उसे
बात
ये
बतानी
है
तुम
गले
मेरे
क्यूँँ
नहीं
लगते
क्या
बिछड़ने
की
तुमने
ठानी
है
ऐ
ख़ुदा
वो
अमान
में
तेरी
उस
पे
अब
तो
भरी
जवानी
है
कैसे
वो
भूल
सकती
है
मुझको
सोच
कर
आँखों
में
ये
पानी
है
मैं
भी
मरता
था
एक
लड़की
पर
बात
ये
अब
बहुत
पुरानी
है
पहले
जो
मेरी
ही
दिवानी
थी
अब
वो
तो
ग़ैर
की
दिवानी
है
राब्ता
हो
मिरा
ख़ुदास
अब
चोट
दिल
की
उसे
दिखानी
है
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उनको
सब
ज़ख़्म
तो
दिखाए
थे
मेरे
घर
पहली
बार
आए
थे
ख़्वाब
मिट्टी
में
सब
मिला
डाले
ख़्वाब
हम
ने
बहुत
सजाए
थे
वो
मिरे
हाथ
से
गया
कैसे
उसने
ता'वीज़
क्या
कराए
थे
ये
मुहब्बत
बहुत
बुरी
है
याँ
हम
को
कुछ
लोग
ये
बताए
थे
ये
जवानी
का
क़िस्सा
है
यारों
इक
मुहब्बत
में
धोखे
खाए
थे
करके
हिम्मत
गुलाब
लाया
था
पैसे
अब्बू
के
वो
चुराए
थे
ख़्वाब
इक
याद
है
बहुत
ज़्यादा
मुझको
पहलू
में
वो
सुलाए
थे
जाने
कब
इश्क़
हो
गया
उन
सेे
रात
इक
पास
वो
बिठाए
थे
कैसे
भी
उनको
इश्क़
हो
हम
से
हम
ने
अपने
हुनर
गिनाए
थे
हम
अभी
तक
वसीम
भूले
नइँ
उसको
हम
गोद
में
उठाए
थे
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नहीं
अब
ज़िंदगी
है
ख़्वाब
में
मैं
हूँ
बर्बाद
तू
फूले
फले
नहीं
कोई
हुआ
झगड़ा
कहीं
मिरी
जाँ
हाथ
फिर
कैसे
कटे
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Vaseem 'Haidar'
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