kal meri likhi ik nazm | कल मेरी लिखी इक नज़्म

  - Utkarsh Musafir
कलमेरीलिखीइकनज़्म
नेख़ुद-कुशीकरली
जिसेअर्सेपहलेमैंनेलिखाथा
जानेक्यूँ
शायदनाराज़थीमुझसे
कईअर्सेसेक़ैदथी
डायरीकेसफ़्होंमेंकहीं
गुमनामसीहोचुकीथीवो
मुझेभीइसबातकाग़महै
मैंनेउसकाख़यालक्यूँनहींकिया
कईमर्तबासोचतातोथा
ज़िक्रभीकरताथाअपनोंसे
फिरअगलीहीदफ़ा
जबसुनताथाकुछइंग्लिशगाने
ज़ेहनसेउतरजाताथाउसतन्हानज़्मकाख़याल
  - Utkarsh Musafir
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