aaj subh jab aasmaañ par kaale | आज सुब्ह जब आसमाँ पर काले

  - Utkarsh Musafir
आजसुब्हजबआसमाँपरकाले
घनेरेअब्रोंकाबसेराथा
मैंअपनेबामपररखीमेज़पर
कलकेअख़बारकेवरक़पलटरहाथा
इकख़बरदिखीउसमेंजोउतरनहींरहीथी
ज़ेहनसेकईमर्तबाध्यानभटकानेकी
जिद्द-ओ-जहदभीकीपरकामयाबहुआ
अख़बारभीमुरझागयाथाइसख़बरसे
शायदअज़ाबथाउसेभी
कैसेकोईइंसानदूसरेइंसानकोमारदेताहै
कुछयूँँमहसूसहोरहाथाजैसेउस
दूसरेइंसानकेसुर्ख़ख़ूनकेधब्बेमेरेअख़बार
केवरक़परभीपड़ेथे
इकअजीबसीताज़ेख़ूनकीबूआनेलगीथी
कौनथागुनहगारइसक़त्लका
वोपहलाइंसानजिसकीथीफ़ितरतऐसी
याख़ुदख़ुदा
जिसनेबनायाथावोक़ातिलइंसान
फ़ैसलाअभीभीबाक़ीहै
  - Utkarsh Musafir
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