samajh na paai ki kya be-mahaar chahta tha | समझ न पाई कि क्या बे-महार चाहता था

  - Ushba Tabeer
समझपाईकिक्याबे-महारचाहताथा
अजीबशख़्सथाख़ुदसेफ़रारचाहताथा
वोमेरीअर्ज़भीहुकमनशुमारकरनेलगा
वोहरतरहसेमिराए'तिबारचाहताथा
उसेक़ुबूलथीवैसेतोमेरीमजबूरी
मगरवोमुझपेज़राइख़्तियारचाहताथा
जवाँदिलोंकेमराहिलतोतयकिएसारे
मगरवोवस्लमेंकुछइंतिज़ारचाहताथा
तमानियतमिलीमुझकोफिरकिसीसूरत
किमेरादिलभीतोहोनाफ़िगारचाहताथा
कभीअश्कबहाओगीमुझसेवा'दाकरो
वोप्यारमेंभीफ़क़तइक़्तिदारचाहताथा
बसइकअनाथीकिजिसनेडुबोदियाउसको
मगरवोफिरभीउसीकाहिसारचाहताथा
तमामशर्तोंपेसरकोहैख़मकियामैंने
किइश्क़दर्दकाइककोहसारचाहताथा
सभीचराग़-ए-मोहब्बतबुझादिएउसने
किवोहवापेभीहोनासवारचाहताथा
वोथकगयाथामोहब्बतकीआरज़ूकरते
बिछड़केमुझसेवोशायदक़रारचाहताथा
येदास्ताँभीउसीशख़्सनेलिखी'उश्बा'
तवीलक़िस्सेमेंजोइख़्तिसारचाहताथा
  - Ushba Tabeer
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