har ghazal KHvaab ki soorat men dhali lagti hai | हर ग़ज़ल ख़्वाब की सूरत में ढली लगती है

  - Ushba Tabeer
हरग़ज़लख़्वाबकीसूरतमेंढलीलगतीहै
तेरेएहसासमेंभीजादूगरीलगतीहै
मुद्दतोंबादयेसावनकोभलाक्यासूझी
मेरीआँखोंमेंतोहररोज़झड़ीलगतीहै
इश्क़मेंहोगईदीवानोंसीहालतमेरी
मौतहर-वक़्तमिरेसरपेखड़ीलगतीहै
हुस्न-ए-ता'बीरमिरीआँखमेंउतराकैसे
तूकोईहूरहैयाकोईपरीलगतीहै
धड़कनेंरक़्समेंज़ंजीर-ज़नीकरतीहैं
अबकिजज़्बातमेंशोरीदा-सरीलगतीहै
भरदियामैंनेतग़ज़्ज़ुलमेंसभीरंगोंको
तेरीतस्वीरनिगाहोंमेंबसीलगतीहै
बजरहीहैकोईपाज़ेबफ़ज़ामेंशायद
चाँदतारोंपेकोईशोख़चढ़ीलगतीहै
दिलहैइकदश्तकीमानिंदतुम्हारा'उश्बा'
तभीक़िस्मतमेंसदातिश्ना-लबीलगतीहै
  - Ushba Tabeer
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