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Upendra Bajpai
muqaddar ka sahaara mil gaya najise tumne pukaara mil gaya na
muqaddar ka sahaara mil gaya najise tumne pukaara mil gaya na | मुक़द्दर का सहारा मिल गया नजिसे तुमने पुकारा मिल गया न
- Upendra Bajpai
मुक़द्दर
का
सहारा
मिल
गया
नजिसे
तुमने
पुकारा
मिल
गया
न
मेरी
टूटी
हुई
कश्ती
न
देखो
कहो,
तुमको
किनारा
मिल
गया
न
- Upendra Bajpai
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तमाम
मस'अले
उठाए
फिर
रहे
हैं
हम
इसीलिए
भी
चलते
चलते
थक
गए
हैं
हम
थे
कितने
कम-नसीब
हम
कि
राबता
न
था
हैं
कितने
ख़ुशनसीब
तुझ
को
छू
रहे
हैं
हम
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Siddharth Saaz
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किताब-ए-मुक़द्दर
में
रांझा
दिवाना
मगर
हीर
बेहद
सयानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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जीत
हूँ
जश्न-ए-मुक़द्दर
हूँ
मैं
ठीक
से
देख
सिकंदर
हूँ
मैं
Ritesh Rajwada
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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इसी
कारण
से
मैं
उसका
बदन
छूता
नहीं
यारों
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
में
वो
लिक्खा
नहीं
यारों
Harsh saxena
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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काश
तू
सब
याद
रखती
और
मैं
सब
भूल
जाता
हाँ
मगर
ऐसा
न
होना
भी
तो
क़िस्मत
थी
हमारी
shaan manral
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कभी
पत्थर
मुक़द्दर
लिख
नहीं
सकता
मगर
समझो
जिसे
पत्थर
में
ढूँढो
हो
तुम्हारे
पास
ही
तो
है
Tanha
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ख़्वाहिश
सब
रखते
हैं
तुझको
पाने
की
और
फिर
अपनी
अपनी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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मिलने
की
तरह
मुझ
सेे
वो
पल
भर
नहीं
मिलता
दिल
उस
से
मिला
जिस
सेे
मुक़द्दर
नहीं
मिलता
Naseer Turabi
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हाए
वो
तिल
कि
छोड़ो
रहने
दो
ग़ैर-वाजिब
है
तज़किरा
करना
Upendra Bajpai
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तेरी
आँखों
में
देखने
के
बाद
मैंने
देखा
नहीं
ख़ुदा
की
तरफ़
Upendra Bajpai
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गर
मैं
देखूँ
तो
सारी
दुनिया
है
गर
मैं
सोचूँ
तो
कुछ
नहीं
अपना
Upendra Bajpai
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मुझे
इक
गुल
में
है
ख़ुशबू
पिरोनी
सो
तेरा
लम्स
लेकर
जा
रहा
हूँ
Upendra Bajpai
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उसको
कोई
बताओ
यहाँ
ज़िन्दगी
भी
है
जो
शख़्स
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
जा
रहा
है
यार
Upendra Bajpai
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