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Umesh Maurya
abhii to door tak manzar nazar nahin aata
abhii to door tak manzar nazar nahin aata | अभी तो दूर तक मंज़र नज़र नहीं आता
- Umesh Maurya
अभी
तो
दूर
तक
मंज़र
नज़र
नहीं
आता
सफ़र
में
चल
पड़े
तो
घर
नज़र
नहीं
आता
यहाँ
तो
देखिए
जो
रहज़नी
में
शामिल
हैं
उन्हीं
की
आँख
में
अब
डर
नज़र
नहीं
आता
- Umesh Maurya
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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जाने
से
कोई
फ़र्क़
ही
उसके
नहीं
पड़ा
क्या
क्या
समझ
रहा
था
बिछड़ने
के
डर
को
मैं
Shariq Kaifi
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ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
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कोई
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
चल
दिया
उदासी
की
मेहनत
ठिकाने
लगी
Adil Mansuri
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मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
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बेकार
ख़यालों
से
लिपटकर
नहीं
देखा
जो
कुछ
भी
हुआ
हम
ने
पलटकर
नहीं
देखा
इस
डर
से
के
कट
जाए
न
बीनाई
के
रेशे
आँखों
ने
तेरी
राहों
से
हटकर
नहीं
देखा
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Farhat Abbas Shah
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लिपट
जाते
हैं
वो
बिजली
के
डर
से
इलाही
ये
घटा
दो
दिन
तो
बरसे
Dagh Dehlvi
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ऐसा
लगता
है
कि
तन्हाई
मुझे
छूती
है
उँगलियाँ
कौन
फिरोता
है
मेरे
बालों
में
Ashok Mizaj Badr
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मैं
इतनी
तेज़
दौड़ा
था
उसे
मिलने
की
ख़ातिर
पर
किसी
ने
चूमकर
पहले
ही
उस
पर
हक़
जता
डाला
Umesh Maurya
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इस
सेे
तो
ठीक
था
कि
परिन्दे
क़फ़स
में
हों
बाहर
तो
दरिन्दों
का
है
मज़मा
लगा
हुआ
Umesh Maurya
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पहाड़ों
को
अगर
तोड़ोगे
तो
पत्थर
बनेंगे
ही
कभी
ठोकर
बनेंगे
या
घरों
के
काँच
तोड़ेंगे
Umesh Maurya
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मैं
हिंदी
और
उर्दू
को
अलग
कैसे
करूँँ
यारों
अगर
साँसें
हटा
दूँ
तो
बदन
में
कुछ
नहीं
बचता
Umesh Maurya
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मेरे
दिल
से
निकल
नहीं
जाता
दर्द
उस
का
पिघल
नहीं
जाता
Umesh Maurya
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