kuchh safeene hain jo gharqaab ikatthe honge | कुछ सफ़ीने हैं जो ग़र्क़ाब इकट्ठे होंगे

  - Umair Najmi
कुछसफ़ीनेहैंजोग़र्क़ाबइकट्ठेहोंगे
आँखमेंख़्वाबतह-ए-आबइकट्ठेहोंगे
जिनकेदिलजोड़तेयेउम्रबितादीमैंने
जबमरूँगातोयेअहबाबइकट्ठेहोंगे
मुंतशिरकरकेज़मानोंकोखंगालाजाए
तबकहींजाकेमिरेख़्वाबइकट्ठेहोंगे
एकहीइश्क़मेंदोनोंकाजुनूँज़महोगा
प्यासयकसाँहैतोसैराबइकट्ठेहोंगे
मुझकोरफ़्तारचमकतुझकोघटानीहोगी
वर्नाकैसेज़र-ओ-सीमाबइकट्ठेहोंगे
उसकीतहसेकभीदरयाफ़्तकियाजाऊँगामैं
जिससमुंदरमेंयेसैलाबइकट्ठेहोंगे
  - Umair Najmi
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