jab se fal aa.e hain shaakhon men lachak jaarii hai | जब से फल आए हैं शाख़ों में लचक जारी है

  - Updesh 'Vidyarthi'
जबसेफलआएहैंशाख़ोंमेंलचकजारीहै
मेरेबाग़ानमेंचिड़ियोंकीचहकजारीहै
नींदगहरीथीकिख़्वाबोंमेंछुआथाउसने
नींदटूटीहैमगरफिरभीमहकजारीहै
मेरेमहताबतेरीयादमेंवोजादूहै
नींदग़ायबहैकिआँखोंमेंचमकजारीहै
हमनेएकबाररिहर्सलपेसुनाथाउसको
आजतककानमेंपायलकीखनकजारीहै
जबसेउनमद-भरीआँखोंकोमैंनेदेखाहै
वादी-ए-इश्क़मेंजीनेकीललकजारीहै
खुलकेइज़हारसर-ए-आमकियाहैहमने
फ़र्क़इतनाहैकिलफ़्ज़ोंमेंझिझकजारीहै
मेरेमहबूबतूसाँसोमेंघुलाहैमेरी
अश्कमीठेहैंमोहब्बतमेंसिसकजारीहै
जीमेंआताहैकिसीनेसेलगालूँउसको
आजतकभीउसेखोनेकीकसकजारीहै
यादहैबातबड़ेशौक़सेवोकहताथा
तेरेहीनामसेइसदिलकीधड़कजारीहै
होशमेंहूँकिकिसीऔरकाहकहैउसपर
लौटकरआएगाएकदिनयेसनकजारीहै
जातेजातेहुएफ़रमानदियाथाउसने
उसकाफ़रमानवहीआजतलकजारीहै
अपनेइसक़ैदसेआज़ादकरोअबमुझको
ऐसेज़िंदाँमेंगुज़िश्ताकीझलकजारीहै
मेरेक़िस्मतमेंतोकुछऔरहीलिखरक्खाहै
तेरेकिरदारपेबेकारहीशकजारीहै
  - Updesh 'Vidyarthi'
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