bah rahi hai phir vahii purwa suhaani raat men | बह रही है फिर वही पुरवा सुहानी रात में

  - Updesh 'Vidyarthi'
बहरहीहैफिरवहीपुरवासुहानीरातमें
चलपड़ीहैस्वप्नकीफिरराजधानीरातमें
लौटआयाहैमेराबचपनदुबाराफिरवही
फिरसुनाएँगीमुझेदादीकहानीरातमें
फिरलुटेगादिलकिसीकादेखनाआकाशमें
बढ़रहीहैचाँदकीफिरनितजवानीरातमें
फिरसितारोंकीकोईबारातनिकलेगीयहाँ
फिरउतरआएँगीपरियाँआसमानीरातमें
फिरचमकनेलगगएजुगनूमेरेअतराफ़में
फिरसेमिलनेगईपागलदिवानीरातमें
फिरकमलखिलनेलगेहैंगाँवकेतालाबमें
फिरमहकनेलगगईहैरातरानीरातमें
छोटीमोटीबातपरलड़नाझगड़नारोज़ही
दिनकीसारीदुश्मनीफिरभूलजानीरातमें
फिरशरारतबढ़गईहैंसारेबच्चोंकीबहुत
फिरडरानेआएगीभूतोंकीनानीरातमें
जबपिशाचोंकामिलनहोताहैकालीरातमें
तबलहूबनजाताहैदरियाकापानीरातमें
औरसुननाहैअगर'उपदेश'आनागाँवमें
फिरसुनाएँगेकभीबाक़ीकहानीरातमें
  - Updesh 'Vidyarthi'
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