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Salma Malik
ab ya to jeena hai ya marna hai
ab ya to jeena hai ya marna hai | अब या तो जीना है या मरना है
- Salma Malik
अब
या
तो
जीना
है
या
मरना
है
कुछ
करना
है
अब
तो
बस
करना
है
फिर
देखा
भी
जाएगा
जो
होगा
या
तो
डूबे
या
पार
उतरना
है
माना
इक
दिन
तो
सबको
मरना
है
फिर
मरने
से
पहले
क्यूँ
मरना
है
मिट्टी
का
ढेला
ख़ाक़
बदन
है
ये
इस
ख़ाक़
बदन
का
फिर
क्या
करना
है
जी
भर
जी
लो,जब
यूँँ
ही
मरना
है
मरने
से
पहले
कुछ
तो
करना
है
इन
आँखों
ने
जो
सपने
देखे
हैं
हर
सपने
को
अब
पूरा
करना
है
बस
इक
कोशिश
मेरे
दिल
की
'सलमा'
न
कभी
मरने
से
पहले
मरना
है
- Salma Malik
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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हम
को
किस
के
ग़म
ने
मारा
ये
कहानी
फिर
सही
किस
ने
तोड़ा
दिल
हमारा
ये
कहानी
फिर
सही
Masroor Anwar
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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हम
तो
कुछ
देर
हँस
भी
लेते
हैं
दिल
हमेशा
उदास
रहता
है
Bashir Badr
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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ख़ुदा
सलामत
रक्खे
तुमको
मेरे
बेटे
तुमने
तो
मेरी
ज़िन्दगी
मुकम्मल
कर
दी
Salma Malik
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माँ-बाप
से
बढ़कर
न
दौलत
दूसरी
उनकी
मुहब्बत
सी
न
जन्नत
दूसरी
हम
कातिबों
को
है
किताबत
लाज़मी
इस
सेे
है
बढ़कर
अब
न
शोहरत
दूसरी
क्या
हम
बताएँ
ये
ग़ज़लगोई
है
क्या
हमको
मिली
ऐसी
न
नेमत
दूसरी
क्यूँ
यूँँ
गँवाए
चार
दिन
की
ज़िन्दगी
हमको
मिलेगी
फिर
न
मोहलत
दूसरी
सारी
शिकायत
ठीक
हैं
'सलमा'
मगर
है
बेवफ़ाई
सी
न
तोहमत
दूसरी
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Salma Malik
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कुछ
इस
तरह
तोड़ा
गया
है
दिल
हमारा
ये
बेवा
की
जैसे
तोड़ता
है
चूड़ियाँ
कोई
Salma Malik
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ज़माने
को
ज़माने
की
ज़रूरत
है
किए
वादे
निभाने
की
ज़रूरत
है
जिधर
देखो
उधर
बस
तीरगी
ही
है
हमें
इक
लौ
जलाने
की
ज़रूरत
है
ज़माना
है
रक़ीबों
में
मिरे
शामिल
रिफ़ाक़त
आज़माने
की
ज़रूरत
है
मिरे
इस
ख़ून
की
स्याही
भरी
जिस
में
क़लम
अब
वो
चलाने
की
ज़रूरत
है
ज़माना
भी
ज़माने
तक
न
भूलेगा
कहानी
वो
सुनाने
की
ज़रूरत
है
मिरे
हिस्से
कभी
आई
नहीं
थी
जो
मोहब्बत
वो
भुलाने
की
ज़रूरत
है
गया
ये
मर
बहुत
पहले
सुनो
'सलमा'
जनाज़ा
अब
उठाने
की
ज़रूरत
है
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Salma Malik
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मैं
भी
अपनी
माँ
के
जैसे
अपनी
बेटी
को
चाहूँ
मैंने
रब
से
चाहा
भी
यही
है
कि
मुझे
इक
बेटी
हो
Salma Malik
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